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राजस्व बढ़ाने कुछ वस्तुओं और सेवाओं पर हो सकता है जीएसटी का ‘अटैक’!

04 Dec 2019
जीएसटी के कारण जल्द ही महंगी हो सकती हैं कुछ वस्तुएं और सेवाएं

DEC 04 (WTN) – लगता है कि मोदी सरकार का सबसे बड़ा आर्थिक सुधार जीएसटी यानी कि गुड्स एण्ड सर्विस टैक्स अब मोदी सरकार के लिए ही परेशानी का सबसे बड़ा कारण बनता जा रहा है। एक जुलाई 2017 को बड़े ही धूमधाम से मोदी सरकार ने जीएसटी को पूरे देश में लागू किया था। लेकिन हक़ीकत यह है कि जिस आशा के साथ जीएसटी को लागू किया गया था, वो आशा पूरी होती दिखाई नहीं दे रही है। दरअसल, हर महीने जीएसटी कलेक्शन उम्मीद के मुताबिक़ नहीं हो रहा है और यही मोदी सरकार के लिए चिन्ता का सबसे बड़ा कारण है।
 
जैसा कि आप जानते हैं कि किसी भी देश के शासन और प्रशासन को सुचारू रूप से चलाने के लिए टैक्स कलेक्शन पर्याप्त मात्रा में होना काफ़ी ज़रूरी है। इसी टैक्स के पैसों से ही देश में जनकल्याणकारी योजनाओं समेत रक्षा और अन्य मदों के लिए फण्ड उपलब्ध हो पाता है। लेकिन यदि टैक्स कलेक्शन ही सही तरीक़े से नहीं होगा, तो किसी भी देश की सरकार को काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। कुछ ऐसी ही परेशानियों का सामना इन दिनों मोदी सरकार को करना पड़ रहा है। दरअसल, जीएसटी के कम कलेक्शन के कारण मोदी सरकार पिछले तीन महीने से कुछ राज्यों को मुआवज़ा नहीं दे पाई है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि क़रीब तीन महीने से जीएसटी का मुआवज़ा न मिलने पर पांच राज्यों पश्चिम बंगाल, पंजाब, केरल, राजस्थान और दिल्ली के वित्त मंत्रियों ने एक संयुक्त बयान जारी कर हाल ही में कहा था कि जीएसटी का मुआवज़ा नहीं मिलने के कारण से राज्य वित्तीय रूप से भारी दबाव में हैं, और वहीं केन्द्र सरकार ने मुआवज़ा जारी ना करने के पीछे कोई वजह भी नहीं बताई है।

अब उम्मीद से कम जीएसटी कलेक्शन के बाद मोदी सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए कई बड़े और कड़े क़दम उठा सकती है। जानकारों के मुताबिक़, मोदी सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए अब कई ऐसी वस्तुओं और सेवाओं को जीएसटी के दायरे में लाने की तैयारी कर रही है, जिन्हें इससे अभी तक छूट मिली हुई है। वहीं कहा जा रहा है कि कुछ वस्तुओं और सेवाओं को पहले से ज़्यादा वाले जीएसटी स्लैब में रखा जा सकता है, जिससे टैक्स कलेक्शन में वृद्धि हो सके। कहा जा रहा है कि इस महीने की 15 तारीख़ को होने वाली जीएसटी काउन्सिल की अहम बैठक में इस बारे में कोई बड़ा फ़ैसला लिया जा सकता है।
 
जानकारी के लिए बता दें कि जीएसटी के नियमों के अनुसार, जीएसटी में राज्यों के कुल राजस्व का क़रीब 60 प्रतिशत हिस्सा होता है। जीएसटी लागू करते समय बाक़ायदा राज्य सरकारों के साथ केन्द्र सरकार का जो समझौता हुआ है, उसके अनुसार जीएसटी लागू होने के बाद इससे होने वाले राजस्व के नुकसान की भरपाई केन्द्र सरकार करेगी। लेकिन जीएसटी के कम कलेक्शन के बाद कई राज्यों को उनके हिस्से का राजस्व नहीं मिल पा रहा है, जिसके कारण इन राज्यों के सामने भारी वित्तीय दबाव है।
 
वैसे नवम्बर के महीने में जीएसटी कलेक्शन की बात करें तो तीन महीने के बाद नवम्बर के महीने में एक बार फ़िर से जीएसटी कलेक्शन एक लाख करोड़ रुपये के स्तर को पार कर गया है। इस साल नवम्बर में जीएसटी कलेक्शन एक साल पहले इसी महीने की तुलना में 6 प्रतिशत बढ़कर 1.03 लाख करोड़ रुपये रहा है, जबकि पिछले साल नवम्बर में जीएसटी कलेक्शन 97,637 करोड़ रुपये ही रहा था। वहीं इस साल अक्टूबर के महीने में जीएसटी कलेक्शन सिर्फ़ 95,380 करोड़ रुपये रहा था।

लेकिन सिर्फ़ नवम्बर महीने के जीएसटी कलेक्शन के एक लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा होने से ही मोदी सरकार संतुष्ट नहीं है। यदि जीएसटी कलेक्शन का औसत निकाला जाए तो अभी भी जीएसटी से मिलने वाला राजस्व उम्मीद से काफ़ी कम है। इसी के चलते अनुमान लगाया जा रहा है कि जीएसटी काउन्सिल की आगामी बैठक में मोदी सरकार कुछ वस्तुओं और सेवाओं को जीएसटी के दायरे में ला सकती और कुछ वस्तुओं और सेवाओं के जीएसटी स्लैब में बदलाव कर सकती है।

अनुमान लगाया जा रहा है कि सरकार ज़ीरो प्रतिशत के स्लैब में आने वाले अनब्राण्डेड अनाज, फ्रेश मीट और दूध आदि वस्तुओं की समीक्षा कर सकती है। वहीं मोदी सरकार कमाई को बढ़ाने के लिए जीएसटी संग्रह को बढ़ाने और टैक्स की चोरी को रोकने के लिए भी समीक्षा कर सकती है। दरअसल, मौजूदा समय में मोदी सरकार की सबसे बड़ी चिन्ता और परेशानी लगातार घटती कमाई है। इसी कारण मोदी सरकार कमाई को बढ़ाने के लिए आने वाले दिनों में कई बड़े और कड़े क़दम उठा सकती है।
 
वहीं सरकार की कमाई में वृद्धि हो इसलिए मोदी सरकार ने राजस्व बढ़ाने के लिए कई राज्यों के अधिकारियों से सुझाव देने के लिए कहा है। तो साफ़ लगता है कि राजस्व बढ़ाने के लिए मोदी सरकार कई वस्तुओं और सेवाओं को जीएसटी के दायरे में ला सकती है या फ़िर उनके टैक्स स्लैब में बदलाव कर सकती है, जिससे जीएसटी कलेक्शन में वृद्धि हो सके। ऐसे में स्वाभाविक है कि जीएसटी लगने या बढ़ने से यह वस्तुएं और सेवाएं महंगी होंगी, और जब वस्तुएं और सेवाएं महंगी होगी तो इससे महंगाई भी बढ़ेगी जिसका सामना करने के लिए आम जनता को तैयार रहना होगा।