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अपने घाटे के लिए रेलवे ख़ुद भी है ज़िम्मेदार!

11 Dec 2019
जल्द बढ़ सकता है रेल किराया, 15 से 20 प्रतिशत तक की हो सकती है वृद्धि
 
DEC 11 (WTN) – कभी आपने ट्रेन के जनरल टिकिट के पीछे लिखी एक लाइन पर ग़ौर किया है। ट्रेन के जनरल टिकिट के पीछे लिखा होता है कि आपकी यात्रा पर जितना व्यय होता है, रेलवे आपसे उसका सिर्फ़ 56 प्रतिशत ही किराये के रूप में वसूल करता है। यानी कि साफ़ ज़ाहिर है कि रेलवे के मुताबिक़ वो यात्रियों से किराये के उतने दाम नहीं वसूलता है, जितना कि वास्तव में किराया होता है। रेलवे के मुताबिक़, वो मौजूदा समय में लागत से औसतन 44 प्रतिशत कम किराया वसूल कर रहा है। अब वहीं हाल ही में सीएजी की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, रेलवे का ऑपरेटिंग रेशियो बढ़कर 98.44 हो गया है। यानी कि रेलवे को 100 रुपये कमाने के लिए 98 रुपये से ज़्यादा की राशि खर्च करना पड़ती है। इन बातों से ज़ाहिर होता है कि रेलवे का व्यय काफ़ी बढ़ गया है।
 
इन सभी संकेतों से साफ़ है कि जल्द ही रेलवे के किराये में वृद्धि हो सकती है। दरअसल, सीएजी रिपोर्ट भी रेलवे के किराये में वृद्धि पर ज़ोर दे रही है। जानकारी के मुताबिक़, किराया बढ़ाने के लिए रेलवे बोर्ड को मन्ज़ूरी मिल चुकी है। कहा जा रहा है कि सभी तरह की ट्रेनों और सभी तरह के क्लास के किराये में वृद्धि हो सकती है। किराये में वृद्धि 5 पैसे प्रति किलोमीटर से लेकर 40 पैसे प्रति किलोमीटर तक हो सकती है। यदि इसी आधार पर रेल किराये में वृद्धि होती है, तो इससे रेलवे के हर क्लास के किराये में 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है।
 
किराया बढ़ाए जाने की घोषणा रेलवे द्वारा दिसम्बर के आख़िरी तक की जा सकती है। जबकि बढ़ा हुआ किराया एक फरवरी, 2020 से लागू हो सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्रेन किराये में आख़िरी बार घोषित वृद्धि साल 2014 में हुई थी, जब भाजपा नेतृत्व में एनडीए सरकार सत्ता में आई थी। उस समय किराये में क़रीब 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। रेलवे के ऑपरेटिंग रेशियो में लगातार होती वृद्धि को देखते हुए साफ़ है कि ट्रेन का यात्री किराया बढ़ना तो तय है, लेकिन यदि यात्री किराया बढ़ाया जाता है तो इसका पुरज़ोर तरीक़े से विरोध भी होगा।

दरअसल, ट्रेन का किराया बढ़ाने की चर्चा काफ़ी समय से हो रही है। रेलवे का तर्क है कि यात्री गाड़ियों के संचालन में उसे नुकसान उठाना पड़ता है। यदि रेलवे के अलग-अलग क्लास की बात करें तो रेलवे को सब अर्बन ट्रेनों के किराये पर क़रीब 64 प्रतिशत का नुकसान उठाना पड़ता है। जबकि नॉन सब अर्बन ट्रेन के सवारी डिब्बों पर क़रीब 40 फ़ीसदी का नुकसान होता है। वहीं एसी फर्स्ट क्लास में क़रीब 24 प्रतिशत नुकसान होता है तो एसी सेकेण्ड क्लास में क़रीब 27 प्रतिशत नुकसान होने की बात रिपोर्ट कहती है।

रेलवे के स्लीपर क्लास की बात करें, तो इससे रेलवे को क़रीब 34 प्रतिशत का नुकसान होता है और एसी चेयर कार से क़रीब 16 प्रतिशत का नुकसान रेलवे को हर साल होता है। जहां तक फ़ायदे की बात है, तो सिर्फ़ एसी थर्ड क्लास से ही रेलवे को यात्रियों को ढोने में लाभ होता है। जानकारी के मुताबिक़, रेलवे को एसी थर्ड क्लास से 7 प्रतिशत फ़ायदा होता है। यानी कि आंकड़ें साफ़ बता रहे हैं कि यात्री सवारियों से रेलवे को किसी भी तरह का कोई भी लाभ नहीं हो रहा है।

कैग रिपोर्ट के मुताबिक़, रेलवे को लगातार घाटे पर घाटा हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे का नेट रेवेन्यू सरप्लस क़रीब 66 प्रतिशत तक कम हो गया है। रेलवे का नेट रेवेन्यू सरप्लस साल 2016-17 में 4,913 करोड़ रुपये था, जबकि साल 2017-18 में यह घटकर 1,665.61 करोड़ रुपये के क़रीब ही रह गया। कैग रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रेलवे की अपनी ख़ुद की इनकम भी 3 प्रतिशत कम हो गई है, जिसकी वजह से ग्रॉस बजटरी सपोर्ट पर रेलवे की निर्भरता बढ़ गई है। वहीं रेलवे के ख़ुद के ख़र्च भी कम नहीं हैं, जानकारी के मुताबिक़ रेलवे को हर साल क़रीब 22,000 करोड़ रुपये वेतन और पेंशन पर ख़र्च करने पड़ते हैं।
 
कैग की रिपोर्ट के मुताबिक़, वित्त वर्ष 2017-18 में रेलवे का ऑपरेटिंग रेशियो 10 सालों में सबसे ख़राब रहा है। अपनी रिपोर्ट में कैग ने रेलवे के घाटे को पूरा करने के लिए कुछ सुझाव भी दिये हैं। जैसे तीन साल से ज़्यादा उम्र के बच्चों के लिए टिकिट अनिवार्य किया जाए। सांसदों और पूर्व सांसदों को मिलने वाली रियायत का 75 प्रतिशत ख़र्च संसदीय कार्य विभाग उठाये। प्रिविलेज पास पर टिकिट की बुकिंग को पूरी तरह से मुफ़्त करने की बजाय रियायत सिर्फ़ 50 प्रतिशत ही हो।

दरअसल, रेलवे को यात्री किराये पर होने वाले घाटे के लिए रेलवे भी काफ़ी कुछ ज़िम्मेदार है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय रेल के रिज़र्व टिकिट किराये में दी जाने वाली सभी तरह की रियायतें कुल यात्री टिकिट आय का 11.45% है। लेकिन इन रियायतों का सबसे बड़ा हिस्सा यानी कि 52.5 प्रतिशत तो रेलवे ख़ुद अपने कर्मचारियों को प्रिविलेज पास देकर ख़र्च कर देता है।
 
रिपोर्ट के अनुसार, एसी क्लास में प्रिविलेज पास का इस्तेमाल हर साल 5.7 प्रतिशत की दर से बढ़ा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय रेलवे किराये में 53 तरह की रियायतें देती है। औसतन एसी क्लास में प्रति यात्री 667 रुपये और नॉन-एसी क्लास में 157 रुपये की रियायत दी जाती है। कैग रिपोर्ट के मुताबिक़, प्रीमियम ट्रेनों में सामान्य यात्रियों को तो किराये में कोई रियायत नहीं मिलती है, लेकिन रेलवे ने अपने कर्मचारियों को किराये में बाक़ायदा रियायत दे रखी है। वैसे प्रिविलेज पास का इस्तेमाल रेलकर्मियों के अलावा अन्य लोग भी करते हैं, लेकिन इस सुविधा का लाथ उठाने वाले क़रीब 62 प्रतिशत लोग रेलवे के कर्मचारी ही होते हैं।
 
यानी कि साफ़ ज़ाहिर है कि रेलवे को यात्रियों को ढोने में भारी नुकसान उठाना पड़ा रहा है, और वहीं अन्य कारणों से रेलवे का ऑपरेटिंग रेशियो बढ़कर 98.44 हो गया है। ऐसे में रेलवे के लिए इस रेशियों को कम करने का सबसे सरल उपाय यात्री किराये में वृद्धि है, लेकिन रेलवे को ख़ुद के मैनेजमेंट की तरफ़ भी ध्यान देना चाहिए कि आख़िर वो अपने स्तर पर इस घाटे को कैसे कम कर सकता है। साफ़ है कि यदि रेलवे को घाटा कम करना है तो उसे ख़ुद की ग़लतियों की तरफ़ भी ध्यान देने की ज़ररूत है।