HOME WORLD INDIA BHOPAL BUSINESS ENTERTAINMENT SCIENCE & TECHNOLOGY SPORTS HEALTH
WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RECIPES DRINKS FUN FACTS WTN HINDI
EDUCATION LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE BIG MEMSAAB OPINION & INTERVIEW BrahMos
ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
BREAKING NEWS

जल्द ही कॉलिंग और डेटा के लिए ख़र्च करने पड़ सकते हैं ज़्यादा रुपये!

13 Dec 2019
ट्राई ने दिये सन्केत, महंगी हो सकती है मोबाइल कॉलिंग और डेटा की दरें

DEC 13 (WTN) – दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले देश भारत में इस समय मोबाइल डेटा दुनिया में सबसे सस्ता है। साल 2016 में जियो की टेलीकॉम सेक्टर में एन्ट्री के बाद से ही भारत में मुफ़्त कॉलिंग और सस्ते डेटा का दौर शुरू हुआ था। मुफ़्त कॉलिंग और डेटा के सस्ता होने के बाद भारत में स्मार्टफ़ोन की बिक्री में भी तेज़ी से इज़ाफ़ा हुआ और आज की तारीख़ में भारत में करोड़ों लोगों के पास स्मार्टफ़ोन है। वहीं सस्ते डेटा के कारण करोड़ों की तादात में भारतीय लोग सोशल नेटवर्किंग साइट्स और मैसेजिंग ऐप्स पर दिन-रात एक्टिव दिखाई देते हैं। वहीं बैंकिंग, वित्त और बिलिंग समेत कई ज़रूरी काम इन दिनों सिर्फ़ मोबाइल के ज़रिये ही हो जाते हैं।

लेकिन समय-समय पर परिवर्तन होते रहते हैं और इसी परिवर्तन के कारण अब मुफ़्त और सस्ती कॉलिंग के साथ-साथ सस्ते डेटा का दौर भी ख़त्म होने वाला है। दरअसल, ट्राई (TRAI) यानी भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने सन्केत दे दिये हैं कि कॉलिंग और डेटा के रेट महंगे हो सकते हैं। यह पढ़कर आपको झटका तो लगा ही होगा, लेकिन कॉलिंग और डेटा के रेट में सम्भावित वृद्धि टेलीकॉम कम्पनियों की मांग पर ही होने जा रही है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कॉलिंग और डेटा के लिए न्यूनतम शुल्क दर तय करने की मांग टेलीकॉम कम्पनियों ने ट्राई से की है, और टेलीकॉम कम्पनियों की इस मांग पर ट्राई गम्भीरतापूर्वक विचार कर सकता है। कहा जा रहा है कि यदि ऐसा होता है, तो इससे घाटे में और कम प्रॉफिट में चल रहीं टेलीकॉम कम्पनियों को काफ़ी राहत मिलेगी। वैसे ट्राई हमेशा से ही न्यूनतम शुल्क दर की सीमा तय करने के मामले में हस्तक्षेप से इनकार करता रहा है।

मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, ट्राई के रुख़ में यह बदलाव भारती एयरटेल के प्रमुख सुनील मित्तल की दूरसंचार सचिव से मुलाक़ात के बाद आया है। दूरसंचार सचिव से अपनी मुलाक़ात में सुनील मित्तल ने कॉलिंग और डेटा के लिए न्यूनतम शुल्क दर तय करने की मांग की है। दरअसल, भारत में दूरसंचार शुल्क पिछले 16 साल से नियंत्रित रहे हैं और उनमें मामूली वृद्धि ही हुई है। ऐसे में जबकि टेलीकॉम कम्पनियों को सरकार का हज़ारों करोड़ रुपये चुकाना है, टेलीकॉम कम्पनियां ट्राई से गुजारिश कर रही हैं कि कॉलिंग और डेटा के लिए न्यूनतम शुल्क दर को तय किया जाये।

साल 2016 में जियो की लॉन्चिग से पहले भारत में मोबाइल पर कॉलिंग और डेटा महंगे थे। लेकिन जियो के मार्केट में आने के बाद से मुफ़्त कॉलिंग और सस्ते डेटा का ऐतिहासिक दौर शुरू हो गया। जियो के इस ऐतिहासिक क़दम से बाक़ी टेलीकॉम कम्पनियों को भी मजबूरी में मुफ़्त कॉलिंग और सस्ते डेटा का ऑफर अपने उपभोक्ताओं को देना पड़ा था। लेकिन काफ़ी कुछ करने के बाद भी बाक़ी टेलीकॉम कम्पनियां जियो को व्यवसायिक टक्कर नहीं दे सकीं और उन्हें घाटे का सामना करना पड़ा।
 
अब जबकि टेलीकॉम कम्पनियों को घाटा उठाना पड़ रहा है, ऐसे में सभी टेलीकॉम कम्पनियों ने ट्राई से गुजारिश की है कि कॉलिंग और डेटा चार्जेस के लिए न्यूनतम शुल्क दर तय की जाए। हालांकि, साल 2012 में जब ट्राई ने मोबाइल कॉलिंग और डेटा शुल्क के नियमन का प्रयास किया था, तो टेलीकॉम कम्पनियों ने इसका ज़ोरदार तरीक़े से विरोध किया था। उस समय टेलीकॉम कम्पनियों का तर्क था कि शुल्क की दरें निर्धारित करने का फ़ैसला ट्राई को उन पर ही छोड़ देना चाहिए।

लेकिन टेलीकॉम कम्पनियों के रुख़ में यह बदलाव सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फ़ैसले के बाद आया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 24 अक्टूबर के एक फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कम्पनियों के सांविधिक बकाए की गणना में ग़ैर दूरसंचार राजस्व को भी शामिल करने के सरकार के क़दम को उचित ठहराया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले के बाद वोडोफ़ोन-आइडिया और भारती एयरटेल समेत अन्य टेलीकॉम कम्पनियों को सरकार का क़रीब 1.47 लाख करोड़ रुपये बक़ाया चुकाना है।
 
मुफ़्त कॉलिंग और सस्ते डेटा से लगातार हो रहे घाटे और सरकार का हज़ारों करोड़ रुपया बक़ाया चुकाने के लिए अब टेलीकॉम कम्पनियों ने ट्राई से गुहार लगाई है कि ट्राई टेलीकॉम दरों का नियमन करे और कॉलिंग और डेटा के लिए न्यूनतम शुल्क दर तय करे। लेकिन यदि ट्राई ने कॉलिंग और डेटा चार्जेस का नियमन किया, तो एक बार फ़िर से देश में कॉलिंग और डेटा महंगा हो जाएगा और सोशल नेटवर्किंग साइट्स और मैसेजिंग ऐप्स पर घण्टों समय बिताने वालों के लिए यह किसी झटके से कम नहीं होगा।