इमरान ख़ान सरकार: एक असफ़ल देश की असफ़ल सरकार
FEB 20 (WTN) – अपनी नीयत और नीति के कारण पाकिस्तान पूरी दुनिया में एक असफ़ल देश के रूप में पहचाना जाता है। भारत और अफगानिस्तान में आतंक फैलाने वाले पाकिस्तान की आर्थिक हालत यह हो गई है कि वहां पर लोगों को दो वक़्त की रोटी तक नसीब नहीं हो पा रही है। आटे से लेकर खाने-पीने की लगभग हर वस्तु महंगी है। वहीं महंगाई के कारण पाकिस्तान की जनता की क्रय शक्ति भी कम हो गई है। इन्हीं सब कारणों से पाकिस्तान की जनता परेशानी का सामना करना रही है। लेकिन इतना सब होने के बाद भी पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार अपने देश की ग़रीबी दूर करने के बजाय भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ाने में अपने संसाधनों को बर्बाद कर रही है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के तौर पर इमरान ख़ान का सबसे पहला कर्तव्य यह है कि वे अपने देश के लोगों की सलामती के लिए प्रयास करें। लेकिन भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने वाली पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार को अपने देश की नागरिकों की कुछ भी चिन्ता नहीं है। जैसा कि आप जानते ही हैं कि चीन में फैले कोरोना वायरस से अभी तक क़रीब 2,100 लोगों की जान जा चुकी है, और क़रीब 75,000 से ज़्यादा लोग कोरोना वायरस के कारण संक्रिमत हैं। चीन में फैले इस वायरस के कारण दुनिया के कई देशों ने चीन के साथ व्यापारिक सम्बन्धों को फ़िलहाल स्थिगत कर दिया है। वहीं कई देशों ने चीन के लिए विमान सेवाएं भी बंद कर दी हैं।
वहीं आप यह भी जानते हैं कि चीन में फैले ख़तरनाक कोरोना वायरस संक्रमण से अपने नागरिकों को बचाने के लिए भारत की मोदी सरकार ने वुहान में फंसे कई भारतीय लोगों को सुरक्षित भारत पहुंचाया है। मुसीबत की घड़ी में मोदी सरकार ने अपने नागरिकों को सुरक्षित भारत लाने के लिए मिशन मोड पर काम किया। भारत ही नहीं, बल्कि कई अन्य देशों ने भी अपने नागरिकों को चीन से सुरक्षित वापस लाने में सफ़लता हासिल की है। लेकिन चीन के चाटुकार देश पाकिस्तान को अपने देश के नागरिकों की कुछ भी चिन्ता नहीं है। जीहां, जबकि दुनिया भर के देश चीन में फैले कोरोना वायरस से अपने नागरिकों को बचाने के लिए उन्हें वापस अपने देश ला रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार ने अपने नागरिकों को चीन में अकेला छोड़ दिया है।
जानकारी के लिए बता दें कि चीन के वुहान शहर में फंसे पाकिस्तानी विद्यार्थी अभी भी वहां से नहीं निकल पाए हैं। दरअसल, आर्थिक रूप से लगभग कंगाल हो चुके पाकिस्तान ने चीन से एकजुटता दिखाने के लिए अपने विद्यार्थियों को चीन से वापस नहीं निकाला है। लेकिन पाकिस्तान सरकार के इस फ़ैसले का वहां पर जमकर विरोध होना शुरू हो गया है। जानकारी के मुताबिक़, पाकिस्तान के नागरिक और चीन में फंसे विद्यार्थियों के परिजन पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतर आए हैं। मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार, वुहान में फंसे पाकिस्तानी विद्यार्थियों के परिजनों और अन्य लोगों ने इमरान ख़ान सरकार के ख़िलाफ़ इस्लामाबाद में जमकर विरोध प्रदर्शन किया, और चीन में फंसे नागरिकों को वहां से वापस निकालने की गुहार लगाई।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कुछ दिनों पहले इंटरनेट पर कई ऐसे वीडियो वायरल हुए थे, जिसमें चीन के वुहान में फंसे पाकिस्तानी विद्यार्थी अपने देश की सरकार से अपील करते दिख रहे थे कि उन्हें चीन से निकाला जाए। पाकिस्तानी विद्यार्थियों ने इमरान ख़ान सरकार को भारत की मोदी सरकार का उदाहरण देते हुए वीडियो में कहा था, “मोदी सरकार ने अपने देश के नागरिकों को चीन से सुरक्षित वापस निकाल लिया है, लेकिन हमारे देश की इमरान ख़ान सरकार ने हमें चीन में असुरक्षित छोड़ दिया है।” बता दें कि चीन के वुहान से जिन पाकिस्तानी विद्यार्थियों ने वीडियो में अपील की थी उनके विश्वविद्यालयों के कई विद्यार्थियों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी।
दरअसल, पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार को भारत के राज्य जम्मू-कश्मीर के मामले में तो दखलंदाजी करने का वक़्त है, और जम्मू-कश्मीर में आतंक फैलाने के लिए संसाधन हैं। लेकिन यही इमरान ख़ान सरकार चीन में फंसे अपने नागरिकों को सुरक्षित बाहर ना निकालने के लिए अजीब तर्क दे रही है। बता दें कि पाकिस्तान सरकार ने घोषणा की थे कि वो चीन से अपने नागरिकों को फ़िलहाल वापस नहीं बुलाएगी क्योंकि मुसीबत के समय पाकिस्तान सरकार चीन के साथ मजबूती के साथ खड़ी है, और चीन के साथ एकजुटता दिखाने के लिए पाकिस्तान सरकार चीन से अपने विद्यार्थियों को वापस नहीं निकालेगी। हालांकि, पाकिस्तान सरकार का कहना है कि वो चीन सरकार के सम्पर्क में है, और वहां पर अपने नागरिकों के लिए ज़रूरी व्यवस्थाएं कर रही है।
इधर, चीन में फंसे नागरिकों का मामला इस्लामाबाद हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। कोर्ट में लगी एक याचिका में कोर्ट से यह गुजारिश की गई है कि कोर्ट पाकिस्तान सरकार को आदेश कि वो चीन में फंसे अपने नागिरकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए कोई क़दम उठाए। याचिका में साफ़ कहा गया है कि जब बांग्लादेश अपने नागरिकों को वहां से निकाल सकता है, तो पाकिस्तान क्यों नहीं?
लेकिन चीन के क़र्ज़दार पाकिस्तान ने चीन के प्रति अपनी चाटुकारिता दिखाते हुए कोर्ट में तर्क दिया था कि दुनिया के 194 देशों में से केवल 23 देशों ने ही अपने नागरिकों को चीन से वापस बुलाया है। लेकिन सरकार के इस तर्क पर कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए कहा था कि जब 23 देश अपने नागरिकों को चीन से सुरक्षित वापस ला सकते हैं, तो पाकिस्तान की सरकार ऐसा क्यों नहीं कर सकती है?
पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार को भारत के आतंरिक मामलों में दखल देने और बयानबाजी करने का तो समय है, लेकिन इमरान ख़ान सरकार को चीन में मुसीबत में फंसे अपने नागरिकों की कोई भी चिन्ता नहीं है। दरअसल, चीन के साथ पाकिस्तान दोस्ताना सम्बन्ध दर्शाने की इसलिए कोशिश कर रहा है क्योंकि पाकिस्तान की ख़राब होती आर्थिक हालत को चीन से मिले क़र्ज़ से सहारा मिल रहा है। लेकिन अब जबकि कोरोना वायरस के कारण ख़ुद चीन की अर्थव्यवस्था संकट में हैं, तो ऐसे में आप ख़ुद ही कल्पना कर सकते हैं कि चीन इन परिस्थितियों में पाकिस्तान की कितनी क्या आर्थिक सहायता कर पाएगा? लेकिन दुनिया के किसी भी देश की सरकार अपने देश के नागरिकों को किसी दूसरे देश में मुसीबत में नहीं छोड़ती है। लेकिन पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार शायद ऐसी पहली सरकार है, जिसे अपने देश के नागिरकों की चिन्ता होने के बजाय चीन के साथ सम्बन्धों की ज़्यादा चिन्ता है।