HOME WORLD INDIA BHOPAL BUSINESS ENTERTAINMENT SCIENCE & TECHNOLOGY SPORTS HEALTH
WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RECIPES DRINKS FUN FACTS WTN HINDI
EDUCATION LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE BIG MEMSAAB OPINION & INTERVIEW BrahMos
ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
BREAKING NEWS

चीन की ‘व्यापारिक दादागीरी’ पर लगी लगाम, अमेरिका बना भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार देश

25 Feb 2020
बढ़ते व्यापारिक सम्बन्धों से मिलेगी भारत-अमेरिकी सम्बन्धों को ‘नई दिशा’
 
FEB 25 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई है। भारतीय अर्थव्यवस्था ने फ्रांस और ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को पछाड़कर इस मुकाम को हासिल किया है। मोदी सरकार भी देश की अर्थव्यवस्था को मज़बूती प्रदान करने में लगी हुई है। और इसी आधार पर प्रधानमंत्री मोदी का सपना है कि साल 2025 तक भारतीय अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाए। हालांकि, वैश्विक आर्थिक सुस्ती समेत कई अन्य घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय कारणों से भारतीय अर्थव्यवस्था को समय-समय पर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन फ़िर भी भारतीय अर्थव्यवस्था अपने आप में इतनी मज़बूत है कि भारतीय अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे ही सही, पर अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए आगे बढ़ रही है।

आप यह जानते ही होंगे कि किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में आयात और निर्यात का काफ़ी बड़ा योगदान होता है। वहीं आप यह भी जानते होंगे कि दुनिया के देशों के बीच ज़्यादातर व्यापार अमेरिकी डॉलर में होता है। यानी यदि किसी देश का अमेरिका के साथ व्यापार लाभ में है, तो कहा जा सकता है कि ऐसा होना उस देश की अर्थव्यवस्था के लिए लाभप्रद स्थिति है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मोदी सरकार के सतत प्रयासों का ही नतीजा है कि अमेरिका अब चीन को पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार देश बन गया है। इससे साफ़ होता कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक सम्बन्ध प्रगाढ़ होते जा रहे हैं। आंकड़ें बताते हैं कि वित्त वर्ष 2013-14 से लेकर 2017-18 तक चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा था, वहीं चीन से पहले यह दर्जा संयुक्त अरब अमीरात को हासिल था।

जानकारी के लिए बता दें कि वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2018-19 में भारत और अमेरिका के बीच 87.95 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ था। वहीं इस दौरान भारत का चीन के साथ द्विपक्षीय व्यापार 87.07 अरब डॉलर का था। इसी तरह वित्त वर्ष 2019-20 में अप्रैल से दिसम्बर के अवधि के दौरान भारत का अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार 68 अरब डॉलर रहा है, जबकि इसी अवधि में भारत और चीन का द्विपक्षीय व्यापार 64.96 अरब डॉलर रहा है।
 
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के जानकारों का मानना है कि जिस तरह से भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक सम्बन्ध बढ़ाने की कोशिशें हो रही हैं, उससे आने वाले समय में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और भी ज़्यादा बढ़ सकता है। वहीं चीन में फैले कोरोना वायरस संक्रमण के कारण आने वाले कुछ समय के लिए भारत का चीन के साथ व्यापार कुछ कम हो सकता है। जहां तक अमेरिका के साथ व्यापारिक सम्बन्धों की बात है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यदि भारत और अमेरिका के बीच मुक्त व्यापार समझौता होता है, तो इससे दोनों ही देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार एक अलग ही स्तर पर पहुंच जाएगा।

कुछ जानकारों का मानना है कि यदि भारत का अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौता होता है, तो इससे भारत को काफ़ी फ़ायदा होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि भारतीय माल एवं सेवाओं का अमेरिका सबसे बड़ा बाजार है। आंकड़ें बताते हैं कि भारत और अमेरिका के बीच निर्यात और आयात दोनों ही बढ़ रहे हैं, जबकि चीन के साथ भारत का आयात और निर्यात दोनों ही कम होते जा रहे हैं।

वैसे जहां तक अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौते की बात है, तो कुछ जानकारों का मानना है कि भारत सरकार को काफ़ी सोच समझकर ही अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौता करना चाहिए क्योंकि अमेरिका एक बहुत बड़ा व्यापारिक देश है। हो सकता है कि मुक्त व्यापार समझौते के तहत अमेरिका धीरे-धीरे भारतीय बाज़ारों पर अपने सामानों से एकाधिकार जमा ले, जैसा कि चीन सालों से करता आया है। वहीं जानकारों का मानना है कि अमेरिका मक्का और सोयाबनी जैसी जिंसों का एक बड़ा उत्पादक और निर्यातक देश है। यदि भारत ने अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौता किया, तो इससे भारतीय किसानों का परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

जैसा कि हमने आपको बताया कि अमेरिका अब चीन को पछाड़कर भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार देश बन गया है। वहीं आपकी जानकारी के लिए यह भी बता दें कि अमेरिका उन चुनिंदा देशों में से एक है, जिसके साथ व्यापार संतुलन में भारत फ़ायदे में रहता है। जानकारी के लिए बता दें कि साल 2018-19 में चीन के साथ व्यापार में भारत को 53.56 अरब डॉलर का घाटा उठाना पड़ा, वहीं इसी समयावधि में अमेरिका के साथ व्यापार में भारत 16.85 अरब डॉलर की लाभ में स्थिति में था।

अमेरिका की प्रगति में क़रीब 40 लाख भारतीय योगदान दे रहे हैं। जहां तक सेवा क्षेत्र की बात है, तो अमेरिका में भारतीय कम्प्यूटर इंजीनियर्स और अन्य प्रोफेशनल्स अपनी प्रतिभा के दम पर सफलता हासिल कर रहे हैं। गूगल और माइक्रोसाफ्ट जैसे दुनिया की बड़ी कम्पनियों के सीईओ भारतीय मूल के ही हैं। ऐसे में सेवा क्षेत्र में तो भारतीय लोगों का अमेरिका में योगदान सराहनीय है ही, लेकिन अब जबकि दोनों देशों के बीच व्यापार सम्बन्धों में वृद्धि हो रही है, तो ऐसे में देखना होगा कि वस्तुओं के व्यापार में भारत इसका कितना फ़ायदा उठा पाता है।