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कोरोना वायरस ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को पहुंचाया भारी नुकसान

13 Mar 2020
कोरोना वायरस से मैन्युफैक्चिरिंग गतिविधियों और सर्विस सेक्टर इण्डस्ट्री को लगा तगड़ा झटका

MARCH 13 (WTN) – चीन के वुहान शहर से फैला कोरोना वायरस जानकारी मिलने तक 4,983 लोगों की जान ले चुका है। चीन के अलावा दुनिया के 100 से ज़्यादा देशों में कोरोना वायरस संक्रमण फैल चुका है। जहां तक भारत में कोरोना वायरस संक्रमण की बात है, तो जानकारी के लिए बात दें कि भारत में भी कोरोना वायरस का कहर शुरू हो चुका है। कोरोना वायरस के कारण कर्नाटक में एक बुजुर्ग व्यक्ति की मौत हो गई है। वहीं भारत में कोरोना वायरस के कारण 70 से ज़्यादा लोग संक्रमित बताए जा रहे हैं। कोरोना वायरस के कारण पूरी दुनिया की आर्थिक गतिविधियों पर काफ़ी नकारात्मक असर पड़ रहा है।

कोरोना वायरस का तगड़ा असर भारतीय शेयर बाज़ार पर भी पड़ा है। एक हफ्ते के अन्दर ही शेयर बाज़ार में 5000 अंकों की गिरावट दर्ज की गई है। जानकारी के मुताबिक़, शेयर बाज़ार में गिरावट के कारण निवेशकों को एक हफ्ते में 23 लाख करोड़ रुपयों का नुकसान हुआ है। भारत ही नहीं, दुनिया के अन्य देशों के शेयर बाज़ार में भी गिरावट जारी है। अमेरिका के शेयर बाज़ार में तो पिछले 30 सालों की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज़ की गई है। आइये आपको विस्तार से बताते हैं कि कोरोना वायरस के कारण दुनिया भर की आर्थिक गतिविधियां किस तरह से प्रभावित हो रही हैं।

जैसा कि आप जानते ही हैं कि कोरोना वायरस को WHO (World Health Organization) यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने महामारी घोषित कर दिया है। भारत समेत दुनिया के कई देशों ने अपनी अंतर्राष्ट्रीय सीमाएं बंद करना शुरू कर दी हैं। भारत सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण से सुरक्षा के मुद्देनज़र विदेश से आने वाले लोगों का वीज़ा 15 अप्रैल तक के लिए सस्पेंड कर दिया है। वहीं, अमेरिका में भी कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के कारण एक महीने के लिए ब्रिटेन को छोड़कर बाकी यूरोप से लोगों के अमेरिका आने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। अब चुंकि दुनिया भर में लोगों का एक दूसरे देश में जाना बंद हो गया है, तो ऐसे में आर्थिक गतिविधियां भी ठप होती जा रही हैं। इसी चिन्ता से भारतीय शेयर बाज़ार समेत दुनिया भर के शेयर बाज़ार में भारी गिरावट दर्ज़ की गई है।

अब जबकि WHO ने कोरोना वायरस को महामारी घोषित कर दिया है, तो ऐसे में दुनिया भर के शेयर बाज़ारों में हुई भारी गिरावट का असर भारतीय शेयर बाज़ारों में भी देखा जा रहा है। जानकारी के लिए बता दें कि पिछले 4 से 5 दिनों में ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का बेंचमार्क इंडेक्स 5600 प्वाइंट्स से ज़्यादा टूटा है। दरअसल, भारतीय शेयर बाज़ार में यह गिरावट ग्लोबल मार्केट में भारी बिकवाली के कारण आई है। कोरोना वायरस के डर से वैश्विक आर्थिक ग्रोथ घटने की आशंका के कारण शेयर बाज़ार में जमकर बिकवाली हो रही है, और इसी कारण से शेयर बाज़ार में गिरावट दर्ज़ की जा रही है।

कोरोना वायरस का असर पहले तो सिर्फ़ चीन तक ही सीमित था, लेकिन अब कोरोना वायरस ने दुनिया के 100 से ज़्यादा देशों को अपनी चपेट में ले लिया है। कोरोना वायरस का काफ़ी नकारात्मक असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने लगा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक़, साल 2020 में वैश्विक अर्थव्यवस्था में सिर्फ़ 2.4% की ही वृद्धि होने की सम्भावना है, जबकि इससे पहले वैश्विक अर्थव्यवस्था में 2.9 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया जा रहा था।

जैसा कि आप जानते ही हैं कि चीन भारी तादात में सामान दुनिया के अन्य देशों को निर्यात करता है। लेकिन कोरोना वायरस के कारण चीन में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ है। चीन में मैन्युफैक्चरिंग स्लोडाउन का असर चीन के पड़ोसी देशों वियतनाम, सिंगापुर, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों पर भी पड़ा है। जानकारों का मानना है कि कोरोना वायरस के कारण भारत समेत दुनिया भर की मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों पर नकारात्मक असर पड़ेगा। कोरोना वायरस के कारण चीन समेत पूरी दुनिया में सर्विस सेक्टर पर भी विपरित पड़ा है। चीन, अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी और भारत समेत दुनिया भर की सर्विस सेक्टर इण्डस्ट्री फरवरी के महीने में कुछ सिमटी है। उपभोक्ताओं द्वारा ख़रीदी सीमित करने के कारण सर्विस सेक्टर इण्डस्ट्री को बड़ा झटका लगा है।    

अब जबकि कोरोना वायरस के कारण वैश्विक आर्थिक गतिविधियां सीमित होती जा रही हैं, ऐसे में आर्थिक गतिविधियां सीमित होने के कारण कच्चे तेल की मांग कम होती जा रही है, और इसी कारण से कच्चे तेल की क़ीमतों में कटौती होती जा रही है। जानकारी के लिए बता दें कि कच्चे तेल की क़ीमतें 30 सालों के सबसे निचले स्तर पर आ गई हैं। इसके अलावा कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती पर OPEC और इसके साथी देशों पर असहमति के कारण तेल की क़ीमतों में भारी गिरावट आई है। जानकारी के लिए बता दें कि चीन दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के कारण चीन में तेल की मांग घट गई है। चीन के अलावा यूरोप के कई देशों में तेल की मांग घटने से तेल निर्यायक देशों के तेल के दाम कम करने पड़े हैं।