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लॉक डाउन के कारण देश की आर्थिक विकास को लगा लम्बा अल्पविराम

27 Mar 2020

आगामी वित्त वर्ष 2020-21 में देश की विकास दर आ सकती है 3 प्रतिशत के नीचे

MARCH 27 (WTN) - इस वक़्त पूरी मानव सभ्यता कोरोना वायरस संक्रमण के ख़िलाफ़ एक निर्णायक युद्ध लड़ रही है। देखते ही देखते कोरोना वायरस के कारण पूरी दुनिया में अभी तक 24,113 लोगों की मौत हो चुकी है। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले देश भारत में भी कोरोना वायरस संक्रमण के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ी जा रही है इसी कारण से भारत सरकार ने पूरे देश में 21 दिनों का लॉक डाउन किया है। लॉक डाउन के कारण पूरे भारत में लोग घरों में रहने को मजबूर हैं। ऐसे में लॉक डाउन के कारण पूरे देश में आर्थिक गतिविधियों पर लगाम लग गई है।

आर्थिंक गतिविधियों के बंद होने से भारत की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगने वाला है। पहले से ही वैश्विक आर्थिक सुस्ती से भारतीय अर्थव्यवस्था को मंदी का सामना करना पड़ा है। ऐसे में लॉक डाउन से अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान होने जा रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक़, 21 दिन के लॉक डाउन से देश की अर्थव्यवस्था को क़रीब 9 लाख करोड़ रुपए का नुकसान होगा। वहीं, आशंका है कि अगले वित्त वर्ष 2020-21 में आर्थिक वृद्धि दर घटकर 2.6 प्रतिशत पर आ सकती है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि SBI रिसर्च की रिपोर्ट इकोरैप की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2019-20 में जीडीपी वृद्धि दर भी 5 प्रतिशत से घटकर 4.5 प्रतिशत रह सकती है। दरअसल, लॉक डाउन के कारण चालू वित्त वर्ष 2019-20 की इस समय चल रही चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर सिर्फ़ 2.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। अब जबकि आर्थिक गतिविधियों पर ब्रेक लग गया है, तो ऐसे में चालू तिमाही के नतीजे निराशाजनक ही आएंगे। वहीं GST कलेक्शन भी कम होने से सरकार के राजस्व पर भी असर पड़ेगा।

रिपोर्ट के मुताबिक़, अगले वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर में भारी गिरावट की आशंका है। ऐसे में आगे भी यही क्रम चलता रहा तो वित्त वर्ष 2020-21 में विकास दर 2.6 प्रतिशत पर आ सकती है। इकोरैप रिपोर्ट में कहा गया है कि 21 दिन के बंद के कारण बाज़ार मूल्य आधार पर कम-से-कम 8.03 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होने की आशंका है। जबकि आय के मामले मे 1.77 लाख करोड़ रुपये का घाटा हो सकता है। इतना ही नहीं, पूंजी आय में 1.65 लाख करोड़ का घाटा उठाना पड़ सकता है।

इस समय मानव समाज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। जान है तो जहान है। तो ऐसे में स्वाभाविक है कि लोगों की ज़िंदगी बचाने के लिए 21 दिन का लॉक डाउन सबसे ज़्यादा ज़रूरी है। जब इंसानी सम्पर्क ख़त्म होगा तभी कोरोना वायरस संक्रमण की चैन को तोड़ा जा सकेगा। ऐसे में सभी को धैर्य रखने की ज़रूरत है। जल्द ही बुरा वक़्त चला जायेगा और देश में जनजीवन एक बार फिर से सामान्य हो जाएगा और आर्थिक गतिविधियां एक बार फिर से तेज़ी से आगे बढ़ने लगेंगी। बस धैर्य रखिए, सब अच्छा होगा।