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आर्थिक संकट से निपटने क्या मोदी सरकार पेश कर सकती है दूसरा बजट?

09 Apr 2020

कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के कारण अनुमान से कम रह सकती है विकास दर

APRIL 09 (WTN) - कोरोना वायरस संक्रमण के कारण भारत समेत दुनिया के क़रीब 200 देश प्रभावित है। चीन के वुहान शहर से उपजा और फैला कोरोना वायरस संक्रमण आज मानव समाज के अस्तित्व पर सबसे बड़ा संकट है। इस लेख को लिखे जाने तक कोरोना वायरस संक्रमण के कारण पूरी दुनिया में अभी तक 89,417 लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना वायरस संक्रमण पर नियंत्रण के लिए भारत में 21 दिन का लॉकडाउन चल रहा है। लॉकडाउन के कारण पूरे भारत में आर्थिक गतिविधियों पर रोक लगी हुई है। ऐसे में भारत की अर्थव्यवस्था पर आने वाले वक़्त में विपरीत असर पड़ सकता है।

दरअसल, संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना वायरस महामारी के कारण उत्पन्न विपरीत परिस्थितियों के कारण भारत की विकास दर अनुमान से काफ़ी कम रह सकती है। UN की एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान भारत की वृद्धि दर घटकर 4.8 प्रतिशत ही रह सकती है। लेकिन इसके बाद आगामी वित्त वर्ष में स्थिति में सुधार होगा, और वित्त वर्ष 2021-22 के लिए वृद्धि दर 5.1 प्रतिशत रह सकती है। वैसे रिपोर्ट में कहा गया है कि ये बेहद प्रारंभिक पूर्वानुमान हैं, और 10 मार्च तक उपलब्ध आंकड़ों और सूचनाओं पर आधारित हैं। लिहाजा इनमें आने वाले समय में बदलाव हो सकता है।

रिपोर्ट में साफ़ चेतावनी दी गई है कि COVID-19 महामारी के कारण दुनिया भर में गंभीर आर्थिक परिणाम होंगे। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कोरोना वायरस महामारी संकट के चलते एशिया और प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक और सामाजिक परिवर्तनों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस क्षेत्र में COVID-19 का दूरगामी आर्थिक और सामाजिक परिणाम होगा, और सीमापार व्यापार, पर्यटन तथा वित्तीय संबंध सबसे अधिक प्रभावित होंगे।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि UN की रिपोर्ट में कहा गया है कि चूंकि COVID-19 महामारी अभी भी तेजी से बढ़ रही है, इसलिए एशिया और प्रशांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं पर इसका नकारात्मक असर बहुत अधिक होने की आशंका है। वहीं जहां तक भारत की बात है, तो रिपोर्ट के अनुसार, भारत की आर्थिक वृद्धि के अनुमानों में पहले की तुलना में काफी कमी आई है, और बेरोज़गारी बढ़ने से भी उपभोक्ता भावनाएं प्रभावित हुई हैं। रिपोर्ट में साफ़ कहा गया है कि भारत को निर्यात के साथ ही कृषि गतिविधियों संबंधी चुनौतियां का गंभीर सामना करना पड़ सकता है।

जैसा कि आप जानते ही हैं कि हाल ही में एक फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश किया था। लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण के कारण परिस्थितियां पूरी तरह बदल गई हैं। बजट पेश करते समय जिन सेक्टर विशेष के लिए जो राशि आवंटित की गई थी, वर्तमान हालात में उस पर फिर से विचार करने की ज़रूरत है। वहीं, जब दो महीने पहले बजट पेश हुआ, तब अर्थव्यवस्था ऐसी मंदी की ओर नहीं बढ़ रही थी, जैसी अब दिख रही है। 

इस समय औद्योगिक उत्पादन ठप पड़ा है। ऐसे में इस समय बेरोज़गारी की दर सार्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच रही है। दूसरे उद्योग भी ऐसे नुकसान के लिए तैयार नहीं थे। इन्हीं सब कारणों से अर्थशास्त्र के कई जानकारों का कहना है कि कोरोनो वायरस महामारी के संकट से पैदा हुए विपरीत हालातों से निपटने के लिए केंद्र सरकार को दूसरा बजट पेश करना चाहिए। अब देखना होगा कि अर्थव्यवस्था पर आए इस बड़े संकट से मोदी सरकार कैसे निपटती है।