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ताइवान ने वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के दौरान वैश्विक महाशक्ति चीन को दिखाया आईना

04 May 2020

चीन की वामपंथी सरकार की तानाशाही को चुनौती देता ताइवान

MAY 04 (WTN) - जैसा कि आप जानते ही हैं कि चीन के वुहान शहर से उपजी और फैली कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी 200 से ज़्यादा देशों के 35 लाख से ज़्यादा लोगों को संक्रमित कर चुकी है। चीन की वामपंथी सरकार की ग़लती, लापरवाही और ग़ैर ज़िम्मेदाराना रवैये के कारण पूरी दुनिया में अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण से क़रीब 2,48,286 लोगों की जान जा चुकी है। लेकिन इतना सब होने के बाद भी, चीन की वामपंथी सरकार अन्य देशों की सहायता करने के बजाय उनसे मुनाफ़ा कमा रही है और बीमारी से लड़ने के नाम पर घटिया समान निर्यात कर रही है।

चीन की वामपंथी सरकार की इन हरक़तों पर दुनिया के कई देश नाराज़गी जता चुके हैं। लेकिन चीन का पड़ोसी एक छोटे सा देश ताइवान इन दिनों चीन को आइना दिखा रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के ख़िलाफ़ ताइवान एक मज़बूत देश बनकर उभरा है। छोटे से देश ताइवान की कोरोना वायरस संक्रमण के ख़िलाफ़ लड़ाई अन्य देशों की तुलना में ज़रा ज़्यादा मुश्किल रही है। ऐसा इसलिए, क्योंकि चीन की वामपंथी सरकार की दबाव की राजनीति के कारण ताइवान को WHO (World Health Organization) यानी कि विश्व स्वास्थ्य संगठन का साथ नहीं मिल पाया है।

दरअसल, WHO के वर्तमान प्रमुख की वामपंथी विचारधारा के कारण इन दिनों WHO में चीन का प्रभुत्व बढ़ता जा रहा है। चीन ने WHO के साथ मिलकर ताइवान के ख़िलाफ़ जो बर्ताव किया है और उसे यानी ताइवान को अलग-थलग करने का जो प्रयास किया है, उसके ख़िलाफ़ ताइवान नाराज़गी जता चुका है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ताइवान ने ही सबसे पहले पूरी दुनिया को आगाह किया था कि कोरोना वायरस बीमारी संक्रमण की बीमारी है। लेकिन चीन के दबाव में WHO ने इस सच्चाई को काफ़ी लम्बे वक़्त तक दुनिया से छिपाकर रखा। और यही कारण है कि कोरोना वायरस संक्रमण की बीमारी चीन के वुहान शहर से निकलकर 200 से ज़्यादा देशों में फैल गई 

इतना ही नहीं, चीन ने वुहान शहर से ताइवान के नागरिकों को बाहर निकलने तक में काफ़ी परेशानियां खड़ी की। चीन की वामपंथी सरकार ने ताइवान के नागरिकों को वुहान से बाहर निकलने के लिए ताइवान के लिए कई कड़ी शर्तें रख दी थीं। इतना ही नहीं, चीन ने ताइवान को डराने के लिए उस समय कुछ बमवर्षक विमान और फाइटर जेट ताइवान के ऊपर उड़ाने शुरू कर दिये थे। लेकिन चीन की वामपंथी सरकार के तमाम तरह के दबाव और WHO के असहयोगात्मक रवैये के बाद भी, क़रीब सवा दो करोड़ की जनसंख्या वाले इस देश में सिर्फ़ चार सौ केस आए हैं और अभी तक सिर्फ़ 6 लोगों की मौत हुई है।

ताइवान की राजनीति के जानकारों के मुताबिक़, कोरोना वायरस संक्रमण के ख़िलाफ़ ताइवान की सरकार के सराहनीय प्रयासों ने उसकी वैश्विक राजनीतिक स्थिति को और भी ज़्यादा मज़बूत किया है। वहीं, चीन की तानाशाही मानसिकता वाली वामपंथी सरकार की वैश्विक छवि बुरी तरह से ख़राब हुई है।

इस सबके बीच, चीन को सबक सिखाने के लिए अमेरिका अब ताइवान को वैश्विक समुदाय के बीच पहले से ज़्यादा समर्थन दे सकता है। लेकिन इससे चीन और अमेरिका के बीच तनाव और भी ज़्यादा बढ़ने की आशंका है। दरअसल, ताइवान और अमेरिका के बीच बढ़ती नज़दीकियों के बीच चीन के विदेश मंत्रालय की और से कहा गया है कि कोरोना वायरस महामारी का सहारा लेकर अमेरिका को ताइवान को शह देना बंद करना चाहिए।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन के अनुसार, ताइवान चीन के ही अधीन रहेगा, लेकिन वो लोकतांत्रिक रूप से अपनी सरकार चला सकता है। चीन की इस तानाशाही का ताइवान में काफ़ी कड़ा विरोध होता है। दरअसल, ताइवान ख़ुद को संप्रभुता सम्पन्न राष्ट्र मानता है।

कोरोना वायरस संक्रमण महामारी में चीन सरकार के ग़ैर ज़िम्मेदाराना रवैये के कारण दुनिया के कई देश चीन से कंपनियां बंद करने पर विचार कर रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि इसका सबसे ज़्यादा फ़ायदा ताइवान को ही मिलेगा, और ताइवान इन प्रयासों में लगा भी हुआ है। दरअसल, इसी आर्थिक नुकसान की आशंका के कारण भी चीन ताइवान पर पहले से ज़्यादा सख़्ती बरत रहा है।

जहां एक तरफ़ चीन की वामपंथी सरकार कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के वक़्त लालच दिखा रही है, तो वही दूसरी तरफ़ ताइवान इस ग्लोबल संकट में अपने सबसे अच्छे डॉक्टर्स, रिसर्चर्स और नर्सेज भेजना चाहता है। लेकिन कई कारणों से ताइवान ऐसा नहीं कर पा रहा है, क्योंकि चीन के दबाव के कारण ताइवान को अब तक WHO के सदस्य देश के तौर पर मान्यता नहीं मिल सकी है।

वहीं, आपकी जानकारी के बता दें कि दुनिया के कई देश कोरोना वायरस संक्रमण से लड़ने के लिए जहां संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में ताइवान ने कहा है कि उसके पास क़रीब 10 मिलियन मास्क हैं, जो वे अमेरिका, इटली, स्पेन और दूसरे यूरोपियन देशों में दान करने को तैयार है। ताइवान सरकार की इन सभी प्रयासों से साफ़ होता है कि ताइवान जैसे छोटे से देश ने चीन जैसे बड़े देश को वैश्विक महामारी के वक़्त आईना दिखा दिया है।