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लॉकडाउन के कारण बुरी तरह से प्रभावित हुई ग्रामीण अर्थव्यवस्था; ट्रैक्टर्स की बिक्री में भारी गिरावट

08 May 2020

लॉकडाउन से किसानों की आय हुई सीमित; ट्रैक्टर्स की सेल पर दिखा असर

MAY 08 (WTN) - जैसा कि आप जानते ही हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण महामारी को फैलने से रोकने के लिए पूरे देश में 25 मार्च से ही लॉकडाउन जारी है। लॉकडाउन के कारण पूरे देश में ग़ैर ज़रूरी आर्थिक गतिविधियों पर रोक लगी हुई है। ऐसे में देश को काफ़ी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कारखानों, मिलों और उद्योगों के बंद होने से ना केवल उत्पादन प्रभावित हो रहा है बल्कि इसके कारण करोड़ों लोगों को नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा है।

लॉकडाउन के कारण शहरी अर्थव्यवस्था तो बुरी तरह से प्रभावित हुई ही है। लेकिन अब लॉकडाउन ने देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की भी कमर तोड़कर रख दी है। जी हां, देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी अब कोरोना वायरस संक्रमण के इस कठिन दौर में संघर्ष करती दिख रही है। दरअसल, ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी यानी किसान भी अब पैसा ख़र्च करने से बच रहा है क्योंकि उसकी आमदनी भी या तो रूक सी गई है या फ़िर बहुत कम हो गई है। ऐसा इसलिए, क्योंकि शहरों के बंद होने से किसानों के कृषि और अन्य सहायक उत्पादों की बिक्री या तो बंद है या फिर सीमित हो गई है

जहां तक आंकड़ों की बात है, तो आपको बता दें कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर लॉकडाउन की चोट पड़ने के कारण पिछले तीन साल में इस बार मार्च के महीने में सबसे कम ट्रैक्टर बिके हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्रैक्टर की कम या ज़्यादा बिक्री कृषि और ग्रामीण क्षेत्र के अर्थव्यवस्था में गिरावट और तेज़ी से सीधे जुड़ी होती है। जैसा कि आप जानते ही हैं कि ट्रैक्टर का ज़्यादातर इस्तेमाल खेती से जुड़े कार्यों के लिए ही होता है, और इसी कारण से इसकी सबसे ज़्यादा बिक्री गांवों में ही होती है।

हालांकि, ज़रूरत के कारण कृषि क्षेत्र को लॉकडाउन के दौरान काफ़ी छूट मिली हुई है। लेकिन बावजूद इसके, कृषि क्षेत्र में सबसे ज़्यादा काम आने वाला ट्रैक्टर ग्रामीण इलाक़ो में नहीं के बराबर बिका है। TMA (Tractor Manufacturers Association) यानी ट्रैक्टर मेन्युफेक्चरर एसोसिएशन के अनुसार, मार्च 2018 में पूरे देश में 83,114 ट्रैक्टर बिके थे। वहीं, मार्च 2019 में पूरे देश में 70,686 ट्रैक्टर्स की सेल हुई थी। लेकिन इस साल मार्च के महीने में पूरे देश में सिर्फ़ 35,216 ट्रैक्टर ही बिक सके।

जैसा कि आप जानते ही हैं कि भारत जैसे कृषि प्रधान देश में ट्रैक्टर का ज़्यादातर इस्तेमाल खेती और उससे जुड़े कामों के लिए ही होता है। वहीं, मार्च के महीने में किसानों की रबी की फसल भी बिकना शुरू हो जाती है और किसानों के पास नक़दी आनी शुरू हो जाती है। लेकिन इस साल मार्च के महीने में कोरोना वायरस संक्रमण के ख़तरे और फिर लॉकडाउन के कारण किसानों की रबी की फसल सही समय पर नहीं बिक सकी और इसके कारण किसानों के पास पैसा ही नहीं पहुंच सका कि वे ट्रैक्टर जैसा महंगा साधन ख़रीद सकें।

हालांकि, खेती के कामों के लिए ट्रैक्टर बहुत ही ज़रूरी साधन है। लेकिन ट्रैक्टर जैसे महंगे साधन को किसान तभी ख़रीदता है जब उसके पास अतिरिक्त पैसा हो। लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण के डर और लॉकडाउन ने ट्रैक्टर उद्योग को बुरी तरह से प्रभावित किया है। अब जबकि ट्रैक्टर उद्योग पूरी तरह से ग्रामीण अर्थव्यवस्था की बेहतरी पर पूरी तरह से निर्भर है, तो ऐसे में ट्रैक्टर की बिक्री में भारी गिरावट का मतलब है कि किसानों को कोरोना वायरस संक्रमण के डर और लॉकडाउन के कारण काफी नुकसान उठाना पड़ा है। 

वहीं, यदि जिन किसानों के पास पैसा है भी, तो उन्होंने लॉकडाउन के दौरान उस पैसे को भविष्य के लिए सहेजकर रखा है। मार्च के महीने में तो फिर भी लॉकडाउन 25 तारीख़ से शुरू हुआ था इसलिए इतने ट्रैक्टर बिक भी गए, लेकिन अप्रैल के पूरे महीने में कड़ा लॉकडाउन होने के कारण ट्रैक्टर की बिक्री कुछ सैकड़ा पर ही सिमट सकती है। स्वभाविक है कि लॉकडाउन के कारण देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका लगा है, और बहुसंख्यक किसानों की आय कम होने के कारण खेती किसानी से जुड़े उद्योगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।