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...तो क्या बिना वैक्सीन के खत्म हो सकती है कोरोना वायरस संक्रमण की बीमारी?

20 May 2020

चीन के वैज्ञानिक का दावा; जल्द बन जाएगी कोरोना वायरस संक्रमण की दवा

MAY 20 (WTN) - चीन के वुहान शहर से उपजी और फैली कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी (COVID-19) इस लेख को लिखे जाने तक क़रीब 3,24,958 लोगों की जान ले चुकी है। दबी ज़ुबान में और खुले तौर पर भी पर अब यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि चीन की वामपंथी सरकार की गलती, लापरवाही और गैर जिम्मेदाराना रवैये के कारण ही कोरोना वायरस संक्रमण पूरी दुनिया में फैल गया है।

इन तमाम आरोपों के बीच, चीन की एक लैबोरेट्री में एक ऐसी दवा विकसित किए जाने का दावा किया जा रहा है कि यह दावा कोरोना वायरस महामारी को रोक सकती है। दरअसल, चीन के वैज्ञानिकों का दावा है कि बिना वैक्सीन के भी कोरोना वायरस संक्रमण का इलाज संभव हो सकता है। 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन की प्रतिष्ठित पेकिंग यूनिवर्सिटी में वैज्ञानिकों द्वारा ट्रायल की जा रही एक दवा के बारे में दावा किया जा रहा है कि यह दवा न केवल संक्रमित लोगों के लिए रिवकरिंग समय को कम कर सकती है, बल्कि वायरस से शॉर्ट टर्म इम्यूनिटी भी दे सकने में सक्षम है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यूनिवर्सिटी की बीजिंग एडवांस्ड इनोवेशन सेंटर फॉर जीनोमिक्स की निदेशक सुनीनी झी के मुताबिक, "ट्रायल फेज में यह दवा पशु पर सफल रही है। और जब हमने संक्रमित चूहों में न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडीज को इंजेक्ट किया, तो यह काफी सकारात्मक रहा है। इसका मतलब है कि इस संभावित दवा का चिकित्सीय प्रभाव है।"

जानकारी के अनुसार, विकसित की जा रही यह दवा वायरस को संक्रमित करने वाली कोशिकाओं को रोकने के लिए मनुष्य के इम्यून सिस्टम द्वारा उत्पादित एंटीबॉडीज को बेअसर करने वाले एंटीबॉडी का उपयोग करती है जिसे झी की टीम ने 60 मरीजों के ब्लड से अलग किया है। इधर, टीम के शोध पर एक अध्ययन में बताया गया है कि एंटीबॉडी का उपयोग करने से बीमारी का संभावित 'इलाज' होता है और रिकवर होने का समय भी कम हो जाता है।

सुनीनी झी के मुताबिक, हमारी विशेषज्ञता इम्यूनिटी साइंस या वायरस साइंस के बजाय सिंगल सेल जीनोमिक्स है। जब हमने महसूस किया कि सिंगल सेल जीनोमिक प्रभावी हो सकता है, तो हमें उम्मीद है कि दवा इस साल के अंत में और किसी भी ठंड के मौसम में वायरस के संभावित प्रकोप का सामना करने के लिए तैयार हो जाएगी।

जानकारी के लिए बता दें कि ट्रायल के लिए क्लिनिकल टेस्टिंग की योजना चल रही है और इसकी टेस्टिंग ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों में की जाएगी क्योंकि चीन में मामले कम हो गए हैं। झी की टीम को उम्मीद है कि ये न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडीज एक विशेष दवा बन सकती है, जो महामारी को रोक सकती है। खैर, अब देखना होगा कि कोरोना वायरस संक्रमण के इलाज का जो दावा चीन के वैज्ञानिकों द्वारा किया जा रहा है वो कितना सही साबित हो पाता है?