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भारत के अलावा अन्य देशों के निशाने पर आए चीनी उत्पाद

10 Jun 2020

चीन की वामपंथी सरकार के अड़ियल और तानाशाही रवैये का हर कहीं विरोध शुरू

JUNE 10 ( WTN) - चीन की वामपंथी सरकार की विस्तारवादी नीति से हर कोई वाकिफ़ है। चीन हमेशा से ही अपने पड़ोसी देशों के साथ विवाद करता आया है। अब जबकि कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के लिए चीन की वामपंथी सरकार की लापरवाही और हठधर्मिता को दोषी माना जा रहा है, ऐसे में चीन को सबक सीखने के लिए चीन में बने सामानों के बहिष्कार की मुहिम भारत के अलावा कुछ और देशों में भी ज़ोर पकड़ती जा रही है।

जैसा कि आप जानते ही हैं कि कोरोना वायरस और सीमा पर चीन के अड़ियल रवैये के कारण भारत में एक बार फिर फिर से चीन का विरोध शुरू हो गया है। भारत के एक बड़े व्यापारी संगठन CAIT ने तो बाकायदा चीन के सामान के बॉयकॉट के लिए एक बड़ा अभियान शुरू कर दिया है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पहले से ही इंटरनेट पर कई बार चीनी में निर्मित सामान के बहिष्कार की मुहिम चलती रहती है। इसके पीछे कई कारण रहे हैं, जैसे डॉग मीट फेस्टिवल, चीन में लोकतंत्र की बहाली, चीन में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार समेत चीन की वामपंथी सरकार की तानाशाही का विरोध।

भारत के अलावा कुछ और देशों में भी चीन की वामपंथी सरकार की तानाशाही के खिलाफ गुस्से का मौहाल रहता है और वहां पर भी चीन में निर्मित सामान के बहिष्कार का अभियान चलता रहता है। बात करें फिलीपींस की, तो यहां पर भी चीन में निर्मित सामानों के बहिष्कार की मुहिम चलती रहती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि चीन और फिलीपींस के बीच पश्चिम फिलीपींस समुद्र को लेकर हमेशा से विवाद रहा है।

दरअसल, पश्चिम फिलीपींस समुद्र को चीन अपने अधिकार क्षेत्र में मानता है और उसे साउथ चाइना सी कहने पर जोर देता रहता है। लेकिन फिलीपींस हमेशा से चीन के इस कदम का विरोध करता रहा है। अब जबकि कोरोना वायरस के कारण चीन का विरोध दुनिया भर में बढ़ता जा रहा है, तो फिलीपींस में और भी तेजी से चीनी सामान के बहिष्कार का अभियान जोर पकड़ता जा रहा है।

बात करें वामपंथी विचारधारा वाले देश वियतनाम की, तो यहां पर भी चीन के खिलाफ दशकों से गुस्सा चला आ रहा है। जैसा कि हमने आपको बताया कि वियतनाम भी कम्युनिस्ट देश है,  लेकिन समान विचारधारा के बाद भी चीन की वामपंथी सरकार वियतनाम पर हमेशा से हावी होने की कोशिश करती रही है।

दरअसल, चीन और वियतनाम के बीच विवाद का कारण भी समुद्री सीमा है। बता दें कि 3.5 मिलियन स्क्वैयर किलोमीटर में फैले साउथ चाइना समुद्र की वियतनामी सीमा में भी चीन के जहाज घुसपैठ करते रहे हैं। चीन हमेशा से ही साउथ चाइना समुद्र पर अपना अधिकार जमाता रहा है।

ऐसा इसलिए, क्योंकि इस समुद्र के प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक संसाधन हैं। यही कारण है कि चीन इस समुद्र के 90 प्रतिशत हिस्से पर अपना दावा करता है। चीन की वामपंथी सरकार की इसी दादागीरी के खिलाफ वियतनाम में भी चीन में निर्मित सामानों का विरोध होता रहा है और मेड इन वियतनाम ब्रांड को बढ़ावा मिलता रहा है

तिब्बत पर कब्जा जमाए चीन के खिलाफ तिब्बतियों में भी बहुत गुस्सा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि तिब्बतियों के धर्म गुरु दलाई लामा के भाई प्रोफेसर थुप्टेन नॉरबु ने तिब्बत को चीन से आजाद करने के लिए चीनी सामानों के बायकॉट की अपील की है। साफ है कि जिस तरह का  चीन का अड़ियल और तानाशाही भरा रवैया रहा है, उससे धीरे-धीरे अन्य देशों में भी चीन में निर्मित सामान के बहिष्कार की मुहिम तेज़ी पकड़ सकती है।