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रक्त में मौजूद टी-सेल्स बचाएंगी आपको कोरोना वायरस संक्रमण से!

12 Jun 2020

...तो जल्द मानव शरीर में कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ विकसित हो जाएगी रोग प्रतिरोधक क्षमता

JUNE 12 (WTN) - चीन के वुहान शहर से उपजी और फैली कोरोना वायरस संक्रमण की बीमारी दुनियाभर के लाखों लोगों की जान ले चुकी है। अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण की कोई भी दवा या वैक्सीन नहीं बन पाई है। दुनियाभर के वैज्ञानिक दवा और वैक्सीन के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। वहीं, कोरोना वायरस संक्रमण पर कई तरह के शोध भी चल रहे हैं और इनमें कोरोना वायरस संक्रमण के होने, फैलने और ठीक होने पर कई तरह के दावे भी किए जा रहे हैं।

इसी कड़ी में कोरोना संक्रमण के लिए वैक्सीन की खोज कर रही सिंगापुर के वैज्ञानिकों की एक टीम ने दावा किया है कि सामान्य सर्दी-जुखाम जिन्हें होता है वे कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी (COVID-19) से बचे रहते हैं। दरअसल, सिंगापुर के Duke-NUS मेडिकल स्कूल में इम्युनोलॉजी डिपार्टमेंट की एक टीम ने दावा किया है कि जुखाम के खिलाफ मानव शरीर में जो रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है वो क़रीब 17 साल तक कोरोना वायरस से होने वाले संक्रमण से शरीर को बचाने में मददगार साबित होती है।

इस रिसर्च में इतना बड़ा दावा किया गया है कि जिन भी लोगों को जुखाम हुआ है उनकी कोरोना संक्रमण की चपेट में आने की आशंका लगभग ना के बराबर होती है। रिसर्च के अनुसार, जुखाम के बाद मानव शरीर में जो रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है वो कोरोना वायरस संक्रमण से बचाने या फिर उसके असर को बेहद कम करने में काफी सक्षम है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस रिसर्च में जुखाम के खिलाफ लड़ने के लिए मानव शरीर में बनने वाले टी-सेल्स को कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ भी कारगर बताया गया है। रिसर्च करने वाली टीम के अनुसार, बीटा-कोरोना वायरस जैसे OC43 और HKU1 मानव शरीर में जुखाम और छाती में संक्रमण पैदा करते हैं। इन सभी वायरस और कोरोना वायरस, MARS और SARS  की जेनेटिक संरचना काफी हद तक एक जैसी ही होती है और यह सभी जानवरों के माध्यम से मानव शरीर में फैलते हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार, कोरोना वायरस परिवार के वायरस ही जुखाम के लिए लगभग 30 प्रतिशत जिम्मेदार होते हैं। लेकिन यह वायरस सर्दी-ज़ुखाम के अलावा कई अन्य खरतनाक बीमारियों के लिए भी जिम्मेदार होते है। रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों के अनुसार, इन वायरस के कारण होने वाले सर्दी-ज़ुखाम के खिलाफ मानव शरीर में सदियों से मौजूद टी-सेल्स सुरक्षा देती आई हैं।

वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना वायरस संक्रमण की जेनेटिक संरचना भी इन वायरस के ही जैसी होने के कारण इस संक्रमण के शरीर में प्रवेश करने पर टी-सेल्स एक्टिव हो जाते हैं और यह सेल्स कोरोना वायरस संक्रमण के प्रभाव को या तो ख़त्म कर देते हैं या फिर उनके असर को बेहद कम कर देते हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि टी-सेल्स मानव के व्हाइट ब्लड सेल्स का ही एक टाइप होती हैं जो कि इम्यून सिस्टम में सेकेंड लाइन ऑफ़ डिफेन्स का काम करती हैं। ये इतनी शक्तिशाली होती हैं कि यह कोरोना वायरस जैसे वायरसों का काफी समय तक मुकाबला कर उसका असर ख़त्म कर देती हैं।

रिसर्च करने वाली सिंगपुर की टीम के अनुसार, धीरे-धीरे ज़ुखाम की ही तरह मानव शरीर कोरोना वायरस संक्रमण के भी खिलाफ टी-सेल्स बना लेगा और मानव शरीर में इसके खिलाफ धीरे-धीरे अपने आप रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाएगी। यदि रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों का दावा सही साबित होता है तो आशा की जानी चाहिए की जल्द ही मानव शरीर में कोरोना वायरस संक्रमण के ख़िलाफ़ रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाएगी।