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जानिए चीन के साथ विवाद में भारत के साथ क्यों खड़ा है अमेरिका?

19 Jun 2020

चीन की भारत को 'सीमित' करने की साजिशें; NATO ने चीन को माना 'बड़ा खतरा'

JUNE 19 (WTN) - विस्तारवादी मानसिकता वाली चीन की वामपंथी सरकार कोरोना वायरस संक्रमण महामारी फैलने के कारण न केवल अपने देश के लोगों के निशाने पर है, बल्कि दुनिया भर के देश चीन से इस महामारी के लिए सवाल कर रहे हैं। लेकिन ग़ैर ज़िम्मेदार चीन की वामपंथी सरकार बजाय कोरोना वायरस संक्रमण महामारी पर कोई जवाब देने के, भारत के साथ युद्ध के मंसूबे पाले बैठी है।

लेकिन चीन की वामपंथी सरकार इस गलतफहमी में है कि आज का भारत 1962 का भारत है, जबकि आज भारत सैन्य और आर्थिक रूप से काफी शक्तिशाली है। इतना ही नहीं, आज के समय में भारत के अन्य देशों के साथ कूटनीतिक रिश्ते भी बहुत अच्छे हैं। ऐसे में लद्दाख में चीन की कायराना हरकत के बाद अमेरिका समेत कई देश भारत के पक्ष में खड़े नज़र आ रहे हैं।

बात करें नाटो की, तो NATO (North Atlantic Treaty Organization) में अमेरिका की शीर्ष दूत बैली हचिसन ने स्पष्ट कहा है कि चीन NATO सेनाओं के रडार पर है, और चीन की हर गतिविधि पर बारीक़ी से नज़र रखी जा रही है। दरअसल, चीन के आक्रामक रवैये के कारण ही NATO उससे नाराज़ है और इससे पहले इस बड़े सैन्य संगठन ने कभी भी चीन को इतना बड़ा ख़तरा नहीं माना था।

विदेश नीति के जानकर कई अमेरिकी विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की पूरी कोशिश है कि भारत और अमेरिका के बीच संबंध बिगड़ें, और चीन ऐसा करने के लिए पूरे प्रयास कर भी रहा है। चीन हमेशा से ही अपने पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद और अन्य विवाद करता रहता है।

NATO के देश चीन की वामपंथी सरकार की चालाकी को अच्छी तरह से समझ चुके हैं। चीन भारत ही नहीं, बल्कि जापान, ताइवान और वियतनाम के साथ भी विवाद करता रहता है। इसी कारण से चीन के साथ NATO के सैन्य संघर्ष की आशंका व्यक्त की जा रही है।

अमेरिका का मानना है कि चीन पूरी कोशिश कर रहा है कि दक्षिण एशिया में भारत की हर प्रकार की चुनौती को सीमित किया जाए। साथ ही चीन पूरी कोशिश में है कि भारत के अमेरिका के साथ अच्छे होते संबंध भी किसी भी तरह से बाधित हो जाएं।

दरअसल, भारत और चीन के बीच जारी विवाद में अमेरिका भारत के साथ इसलिए खड़ा दिख रहा है क्योंकि खाड़ी एवं पश्चिमी हिंद महासागर अमेरिका के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। और चीन इन्हीं  इलाकों में अमेरिका की श्रेष्ठता को चुनौती देने के लिए इन इलाकों के अन्य देशों को अपने तरफ करने की कोशिश कर रहा है।

साफ है कि चीन दक्षिण एशिया में भारत को एक बहुत बड़ी चुनौती मानता है। वहीं, भारत चीन को अपने से उच्चतर न मानकर अपने बराबर मानता है। अब जबकि चीन भारत को घेरने के लिए हर तरह के हथकंडे अपना रहा है, तो ऐसे में अमेरिका का मानना है कि भारत को अमेरिका और जापान जैसे सहयोगियों की मदद की इस समय बेहद ज़रुरत है।

ऐसे में चीन के ख़िलाफ़ खुद का स्वार्थ सिद्ध करने के लिए अमेरिका भारत को आर्थिक एवं सैन्य क्षमताएं विकसित करने में काफी योगदान दे सकता है। और यदि ऐसा होता है, तो स्वाभाविक है कि चीन को अमेरिका का यह क़दम रास नहीं आएगा और वो जमकर विरोध करेगा। वहीं, यदि चीन अमेरिका से उलझने की कोशिश करता है, तो चीन को NATO की शक्ति का सामना करना पड़ेगा।