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...तो 'इस कारण" से बौखलाया हुआ है चीन

22 Jun 2020

LAC पर भारत की बढ़ती ताक़त से तिलमिलाई चीन की वामपंथी सरकार

JUNE 22 ( WTN) - लद्दाख की गलवान घाटी में जिस तरह से भारतीय सैनिकों ने चीन की PLA को सबक सिखाया है उससे चीन की वामपंथी सरकार तिलमिलाई हुए है। हालांकि, PLA के साथ संघर्ष में भारत के 20 जवान वीर गति को प्राप्त हुए, लेकिन अपुष्ट सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि भारतीय सेना के साथ हुए संघर्ष में PLA के भी कई जवान मारे गए हैं। 

लेकिन चीन की वामपंथी सरकार जब कोरोना वाइरस संक्रमण महामारी से मारे गए लोगों की सही जानकारी तक नहीं दे सकती है, तो अपने सैनिकों के मारे जाने की सही सूचना क्या देगी? खैर, आप सोच रहे होंगे कि क्या कारण है कि चीन की वामपंथी सरकार इन दिनों इतना बौखलाहट में क्यों है? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इसका कारण है मोदी सरकार के भारत हितैषी रणनीतिक काम।

जी हां, जब से नरेन्द्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बने हैं, तब से चीन सीमा पर LAC पर अब इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से काफ़ी बेहतर हो गया है। और ऐसा होने पर अब भारतीय सैनिकों को यहां पर पेट्रोलिंग करने में आसानी होती है। साफ है कि विस्तारवादी मानसकिता वाली चीन की वामपंथी सरकार को भारतीय सैनिकों की पेट्रोलिंग देख कर बौखलाहट होती है।

इतना ही नहीं, चीन को भारत के हिस्से में वो रोड और ब्रिज भी खटक रहे हैं जिन्हें पिछले कुछ सालों में मोदी सरकार ने बनवाए हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पहले LAC के कई इलाकों में भारतीय सैनिकों को पहुंचने में कई घंटे तक लग जाते थे, लेकिन अब भारतीय सेना कुछ ही समय में वहां पर पहुंच जाती है।

एक अंग्रेजी समाचार पत्र में R&AW के एक पूर्व अधिकारी के अनुसार, 1980 और 1990 के दशक में चीन ने आर्थिक, सैन्य और बुनियादी ढांचे के निर्माण में काफी प्रगति की और इस क्षेत्र में भारत को पीछे दिया। 90 के दशक में सीमा प्रबंधन को लेकर चीन के साथ कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए थे, लेकिन इससे भारत का पक्ष कमजोर होता चला गया था। तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी ने संसद में ख़ुद स्वीकार किया था कि भारत, चीन के साथ बुनियादी ढांचे की रेस में काफी पीछे रह गया है।

इस दिशा में पहले की सरकारों ने कई नीतियां भी बनाई, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कुछ नहीं हो सका। लेकिन साल 2014 में जैसे ही नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद संभाला, वैसे ही उन्होंने चीन के सीमावर्ती इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर करने पर ज़ोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने ही डोकलाम में चीन की नापाक चाल को कुचल दिया था। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने RCEP पर रोक लगा दी थी और चीन के ड्रीम प्रोजेक्ट OBOR का भी कड़ा विरोध किया था।

चीन से सटी सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर मज़बूत करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने BRO (Border Road Organization) को LAC के 100 किलोमीटर एरियल डिस्टेंस के अंदर 66 अलग-अलग रोड बनाने को कहा है। इतना ही नहीं, पहले इन सड़कों को बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय और पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति लेनी पड़ती थी, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने अब बड़े फ़ैसले लेने की BRO के बड़े अधिकारियों को छूट दे दी है।

BRO की डेटा के अनुसार, नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद चीन सीमा पर रोड बनाने के काम मे काफी प्रगति हुई है। BRO के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2008 से 2017 के बीच एक साल में LAC में सिर्फ 230 किलोमीटर रोड बनती थी। लेकिन 2017 से 2020 के बीच हर साल 470 किलोमीटर लंबी सड़क बनी। वहीं, साल 2008 से लेकर 2014 के बीच सिर्फ एक सुरंग बनाई गई थी। लेकिन पिछले 3 सालों में यहां 6 सुरंग बनी हैं।

इतना ही नहीं, साल 2008 से 2014 तक सिर्फ 7270 मीटर लंबे ब्रिज बने थे। लेकिन साल 2014 से 2020 के बीच 14,450 मीटर लंबे ब्रिज बनाए गए हैं।
साफ है कि नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से चीन की सीमा से लगी भारतीय सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर के काम में काफ़ी तेज़ी आई है। अब LAC के कई इलाकों में भारतीय सेना कुछ ही समय में पहुंचने में सक्षम हो गई है। यही कारण है कि चीन की वामपंथी सरकार भारत के इनफ्रास्ट्रक्चर के कामों से बौखलाकर सीमा पर तनाव पैदा करने की कोशिश कर रही है। लेकिन उसके नापाक मंसूबों को भारतीय सेना असफल कर चुकी है और करती रहेगी।