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चीन को सामरिक तऱीके से 'इस तरह' से घेरे हुए है अमेरिका

27 Jun 2020

चीन की दादागिरी पर लगाम लगाने एशिया में अपनी सैन्य ताक़त और बढ़ाएगा अमेरिका

JUNE 27 (WTN) - गवलान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद लगातार दोनों देश LAC पर अपनी सैन्य ताक़त बढ़ा रहे हैं , और जिसके कारण LAC पर 'तनाव' बना हुआ है। बढ़ते हुए तनाव के कारण ही भारत और चीन के बीच युद्ध की आशंका व्यक्त की जा रही है।

अब जबकि भारत और चीन के बीच युद्ध के हालात बनते जा रहे हैं, ऐसे में चीन की बढ़ती 'दादागिरी' पर लगाम लगाने के लिए अमेरिका खुलकर भारत के 'समर्थन' में आ गया है। जी हां, अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने स्प्ष्ट कह दिया है कि चीनी सेना के ख़तरे से निपटने के लिए एशिया में अमेरिका अपने सैनिकों की तैनाती बढ़ाएगा।

दरअसल, अमेरिका अच्छी से जानता है कि चीन, भारत और अन्य पड़ोसी देशों के लिए एक 'बड़ा ख़तरा' है। चीन के जितने भी पड़ोसी देश हैं उन सबसे चीन के सीमा विवाद हैं। इतना ही नहीं, चीन के आसपास समुद्र में स्थित देशों के साथ भी चीन के सीमाई विवाद हैं। चीन की बढ़ती 'दादागिरी' एक तरह से अमेरिका के वर्चस्व को चुनौती है। ऐसे में अमेरिकी विदेश मंत्री ने साफ-साफ चीन को चेतावनी दी है कि यदि ज़रूरत पड़ी तो अमेरिकी सेना, चीन की PLA (People's Liberation Army) से मुक़ाबला करने को तैयार है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका ने काफी पहले से ही साम्यवादी चीन को एक 'बड़ा शत्रु' मानकर रखा है। USSR के पतन के बाद रूस अब इतनी बड़ी शक्ति नहीं बचा है कि वो अमेरिका प्रभुत्व को चुनौती दे सके। ऐसे में अब अमेरिका की 'सर्वोच्चता' के सामने चीन ही सबसे बड़ी चुनौती पेश कर रहा है।

इसी कारण से अमेरिका ने चीन को काफी 'योजनाबद्ध तरीक़े' से घेरकर रखा है। चीन के आस-पास अमेरिका के काफी सारे बेस हैं जो युद्ध होने की दशा में चीन के ख़िलाफ़ अमेरिका के लिए सबसे बड़े 'हथियार' हैं। अमेरिका ने पहले ही ताइवान के नज़दीक प्रशांत महासागर में अपने तीन न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट कैरियर USA थियोडोर रूजवेल्ट, USA निमित्ज और USA रोनाल्ड रीगन तैनात कर दिए हैं।

वहीं, चीन को चारों तरफ से घेरने के लिए  पूरे एशिया में अमेरिका के 2 लाख से ज़्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। अब जबकि भारत के साथ चीन का सीमा विवाद बढ़ता ही जा रहा है, ऐसे में अमेरिका के विदेश मंत्री का यह बयान कि चीनी सेना के ख़तरे से निपटने के लिए एशिया में अमेरिका अपने सैनिकों की तैनाती बढ़ाएगा, चीन के लिए एक बड़ी चेतावनी है।

आपकी जानकारी के कैश बता दें कि अमेरिका के दुनिया में क़रीब 800 सैन्य ठिकाने हैं। लेकिन वहीं चीन की घेराबंदी के लिए अमेरिका के पास कई महत्वपूर्ण सामरिक बेस एशिया में भी हैं। अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण बेस गुआम द्वीप है जो कि प्रशांत महासागर में मौजूद है। इसी गुआम द्वीप में अमेरिका का हथियारों का सबसे बड़ा ज़खीरा है। वहीं, मालदीव में डियेगो गार्सिया में अमेरिकी और ब्रिटिश नौसेना का बेस मौजूद है। साथ ही सिंगापुर, ताइवान, दक्षिण कोरिया, और जापान में भी अमेरिका का सैन्य ठिकाना है। बात करें जापान की, तो जापान में अलग-अलग 10 बेस पर एक लाख से ज़्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।

अमेरिका की यही घेराबंदी चीन को हमेशा परेशान करती रहती है। अमेरिका ने कई देशों में अपने सैन्य ठिकाने इसलिए बनाए हैं क्योंकि इनमें से कई उसके मित्र देश हैं, और इन देशों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी अमेरिका ने ले रखी है। इसी कारण से चीन के पड़ोसी देशों जापान, दक्षिण कोरिया और फिलीपींस में अमेरिकी सेना की तैनाती है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका ने चीन के संभावित ख़तरे को देखते हुए वियतनाम, मलेशिया और इंडोनेशिया को भी चीन की दादागिरी से सुरक्षा प्रदान करने की बात कही है। साफ है कि चीन को अमेरिका ने चारों तरफ से घेरकर रखा है। चीन की बढ़ती दादागिरी से परेशान और नाराज़ देश अब खुलकर चीन के ख़िलाफ़ आ गए हैं। ऐसे में भारत के साथ बढ़ते विवाद के बाद एशिया में अमेरिका सेना की बढ़ती संख्या चीन के लिए चिंता का कारण है।