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हवा में मौजूद मामूली कणों से भी फैल सकता है कोरोना वायरस संक्रमण!

06 Jul 2020

कोरोना वायरस को लेकर वैज्ञानिकों ने WHO को दी नई 'चेतावनी'

JULY 06 (WTN) - कोरोना वायरस संक्रमण इस समय मानव सभ्यता के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। चीन की वामपंथी सरकार की ग़लती, लापरवाही और ग़ैर ज़िम्मेदाराना रवैये के कारण कोरोना वायरस संक्रमण से अभी तक क़रीब 5 लाख 37 हज़ार लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, क़रीब 1 करोड़ 15 लाख 75 हज़ार से ज़्यादा लोग कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी से संक्रमित हो चुके हैं।

जैसा कि आप जानते ही हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण की अभी तक कोई भी दवा या वैक्सीन नहीं बन पाई है। ऐसे में पूरी दुनिया के डॉक्टर्स कोरोना वायरस संक्रमण से संक्रमित रोगियों का इलाज अपने स्तर पर कर रहे हैं। हालांकि, कोरोना वायरस की दवा और वैक्सीन की खोज में वैज्ञानिक दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई भी ठोस सफलता हासिल नहीं हो सकी है।

लेकिन इस सबके बीच, कोरोना वायरस संक्रमण महामारी पर WHO (World Health Organization) यानि विश्व स्वास्थ्य संगठन की भूमिका शक़ के घेरे में रही है। अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों ने कोरोना वायरस संक्रमण के मामले में WHO पर लापरवाही बरतने और बीमारी के बारे में चीन के दवाब में आकर सही जानकारी और सलाह नहीं देने का आरोप लगाया है।

इस सबके बीच, कोरोना वायरस को लेकर 32 देशों के 239 वैज्ञानिकों ने WHO को एक पत्र लिखकर सलाह और चेतावनी दी है वो कोरोना वायरस से संबंधित अपनी गाइडलाइन्स को बदले क्योंकि कोरोना वायरस हवा में भी मौजूद रहता है। दरअसल, वैज्ञानिक इस पत्र से जुड़ी सारे बातों को एक जर्नल में प्रकाशित करना चाहते थे। लेकिन इससे पहले ही यह पत्र मीडिया में लीक हो गया।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वैज्ञानिकों ने WHO से अपील की है कि कोरोना वायरस से संबंधित गाइडलाइंस को जल्द बदला जाए। वैज्ञानिकों के अनुसार, "हवा में मौजूद मामूली कण से भी लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो रहे हैं क्योंकि कोरोना वायरस हवा में लम्बे समय तक रह सकता है और कई मीटर तक मौजूद लोगों को संक्रमित कर सकता है।"

वैज्ञानिकों के मुताबिक, "हवा में कोरोना वायरस के लम्बे समय तक रहने से बंद कमरे या बस आदि जगहों पर संक्रमण काफी तेजी से फैल रहा होगा। ऐसे में एक ही कमरे में काम करने वालों को पहले से ज़्यादा सतर्क रहने की ज़रुरत है क्योंकि लॉकडाउन हटने के बाद इस तरह का ख़तरा ज़्यादा बढ़ गया है।"

पत्र लिखने वाले वैज्ञानिकों की टीम में शामिल ऑस्ट्रेलिया की क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी की प्रोफेसर लिडिया मोरावस्का के अनुसार, "हम इस बात को लेकर 100 प्रतिशत आश्वस्त हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण हवा के मामूली कणों से भी लोगों को संक्रमित कर सकता है।"

वैज्ञानिकों का यदि यह दावा WHO मानता है, तो WHO को कोरोना वायरस से संबंधित अपनी गाइडलाइन्स बदलनी पड़ सकती है। हो सकता है कि WHO की नई गाइडलाइन्स के मुताबिक जिन जगहों पर बेहतर वेंटिलेशन नहीं है, वहां लोगों को दूर बैठने के बावजूद अनिवार्य रूप से मास्क पहनने की हिदायत दी जा सकती है।

दरअसल, कोरोना वायरस के मद्देनज़र WHO का कहना है कि मुख्य तौर पर कोरोना वायरस संक्रमित व्यक्ति के कफ या छींकने के दौरान Large Respiratory Droplets से ही कोरोना वायरस संक्रमण फैलता है। WHO को चाहिए कि वो इन वैज्ञानिकों के पत्र पर गंभीरता से विचार करे और इसे हल्के में न ले। क्योंकि इससे पहले WHO ने चीन के दवाब में आकर ताइवान की उस बात को काफी देर से स्वीकार किया था कि कोरोना वायरस संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। आशा है कि WHO अब चीन के दवाब में आकर कोई भी सही फ़ैसला लेने में वक़्त नहीं लगाएगा।