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नेपाल में चीन के लगातार बढ़ते 'हस्तक्षेप' से पाकिस्तान बनने की राह पर नेपाल!

09 Jul 2020

नेपाल में अपनी मर्यादाओं को लांघती चीन की राजदूत!

JULY 09 (WTN) - संयुक्त राष्ट्र संघ के नियमानुसार किसी भी देश के राजदूत को दूसरे देश में 'नियमों' और 'मर्यादाओं' का पालन करना चाहिए। लेकिन 'विस्तारवादी मानसिकता' वाली चीन की वामपंथी सरकार किसी भी तरह के नियमों को भला कहां मानती है। यदि चीन की वामपंथी सरकार को नियमों की इतनी ही 'चिंता' होती, तो वहां की सरकार कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी वुहान में फैलने के बाद WHO और अन्य देशों को इसकी जानकारी देकर उन्हें 'विश्वास' में लेती।

ख़ैर, नियमों को नहीं मानने वाली और कमजोर देशों की अंदरूनी राजनीति में 'दखल' देने वाली चीन की वामपंथी सरकार को अब भारत के पड़ोसी देश नेपाल में 'विरोध' का सामना करना पड़ रहा है। जैसा कि आप जानते ही होंगे कि नेपाल की घरेलू राजनीति में इन दिनों चीन की राजदूत होउ यान्की का काफी दख़ल चल रहा है।

भारत विरोधी मोर्चा खोले नेपाली प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली की कुर्सी पर मंडराता 'ख़तरा' देखकर चीनी राजदूत होउ यान्की लगातार नेपाल के सत्तारूढ़ दल, कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं से मुलाकात कर रही हैं और ओली को सत्ता में बनाए रखने के लिए पार्टी के विरोधी खेमे के नेताओं को मनाने में लगातार लगी हुई हैं। लेकिन चीन के राजदूत के इस तरह के राजनीतिक हस्तक्षेप से नेपाल में धीरे-धीरे 'आक्रोश' बढ़ता ही जा रहा है।

इसी कड़ी में मंगलवार को काठमांडू स्थित चीनी दूतावास के पास नेपाल के विद्यार्थियों ने चीन विरोधी पोस्टर लेकर जमकर विरोध-प्रदर्शन किया। नेपाली की राजनीति में चीनी राजदूत होउ यान्की के 'हस्तक्षेप' के ख़िलाफ़ नेपाली विद्यार्थियों में गुस्सा देखा गया। नेपाल के विद्यार्थियों का साफ कहना है कि चीनी राजदूत को अपने दूतावास तक ही सीमित रहना चाहिए न कि नेपाल की अंदरूनी राजनीति में हस्तक्षेप करना चाहिए। इधर, नेपाल की मीडिया में भी चीनी राजदूत की नेपाल की राजनीति में बढ़ती 'सक्रियता' को लेकर कड़ी आलोचना हो रही है।.

दरअसल, भारत विरोधी नीति और चीन को नेपाल में फ्री हैंड देकर नेपाल के प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली विपक्ष के साथ-साथ अपनी ही पार्टी के नेताओं के निशाने पर हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री ओली से उनकी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। नेपाल की सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की 44 सदस्यीय स्टैंडिंग कमिटी के 30 सदस्यों ने ओली के पार्टी प्रमुख और प्रधानमंत्री दोनों पदों से इस्तीफे की मांग की है।

अब जबकि नेपाल के प्रधानमंत्री ओली, चीन समर्थक माने जाते हैं। इसलिए ओली की कुर्सी बचाने के लिए चीनी राजदूत होउ यान्की लगातार कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं से मुलाकात कर रही हैं। लेकिन एक राजदूत की गरिमा और नियमों के ख़िलाफ़ जाकर चीन की राजदूत यान्की की गतिविधियों से नेपाल में नाराज़गी है और नेपाल में अब इसे लेकर ओली सरकार से लोग 'सवाल' कर रहे हैं।

पिछले कुछ दिनों में चीन की राजदूत नेपाल की राष्ट्रपति से लेकर सत्तारूढ़ पार्टी के कई शीर्ष नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर चुकी हैं। लेकिन चीनी राजदूत जिस तरह से मुलाकातें कर रही हैं उसमें 'प्रोटोकॉल' तक का पालन भी नहीं किया जा रहा है। नियमानुसार इन मुलाकातों के समय विदेश मंत्रालय का एक प्रतिनिधि मौजूद होना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं होता। वहीं, चीनी राजदूत की नेपाली नेताओं से मुलाकातों को लेकर दोनों पक्षों में से किसी भी तरह पक्ष की ओर से कोई भी जानकारी साझा नहीं की जा रही है 

दरअसल, चीनी की राजदूत ऐसे समय में नेपाल की सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं से मुलाकात कर रही हैं जब सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी दो धड़ों में बंट गई है और उनके बीच विवाद चरम पर पहुंच गया है। स्वाभाविक है कि चीन की राजदूत की इस तरह की घुसपैठ से नेपाल के लोगों में 'नाराज़गी' बढ़ती जा रही है। देखा गया है कि पिछले पांच-छह सालों में नेपाल की आंतरिक राजनीति में चीन का 'दखल' बढ़ता ही गया है।

इधर, नेपाल की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के प्रवक्ता नारायण काजी श्रेष्ठ नेपाल की अंदरूनी राजनीति में चीन की 'दखलंदाज़ी' के तमाम तरह के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि नेपाल एक संप्रभु देश हैं, और नेपाल अपने निर्णय खुद करने में सक्षम है। ख़ैर, लेकिन जिस तरह से चीन की राजदूत नेपाल की अंदरूनी राजनीति में 'हस्तक्षेप# कर रही हैं, उससे नेपाल की जनता को 'डर' है कि कहीं नेपाल भी पाकिस्तान की तरह चीन का एक 'गुलाम' देश न बन जाए।