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कोरोना वायरस से रिकवर होने के बाद भी मस्तिष्क संबंधित बीमारियों का 'ख़तरा'

10 Jul 2020

अध्ययन से हुआ खुलासा: अब दिमाग को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है कोरोना वायरस

JULY 10 (WTN) - चीन के वुहान शहर से फैली कोरोना वायरस संक्रमण महामारी कितना विकराल रूप धारण कर चुकी है यह तो आप देख ही रहे हैं। इस लेख को लिखे जाने तक, कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के कारण अभी तक क़रीब 5,57,510 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, इस बीमारी के कारण अभी तक क़रीब 1,23,94,709 लोग संक्रमित हो चुके हैं।

आपको बता दें कि कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी अब इतना खतरनाक हो चुका है कि यह अब सीधे मस्तिष्क को प्रभावित करने लगी है और इसके कारण अब दिमाग तक अपना काम करना बंद कर दे रहा है। दरअसल, जर्मनी में हुई एक स्टडी में यह बात सामने आई है कि अब किस तरह से कोरोना वायरस मानव मस्तिष्क तक पहुंच कर उसे प्रभावित कर रहा है।

दरअसल, जर्मनी में वैज्ञानिकों ने गौर किया कि कोरोना वायरस संक्रमण से गम्भीर रूप से संक्रमित मरीज़ों में कंपकंपी, दौरे पड़ना और होश खोने जैसी परेशानियां देखी जा रही हैं, जिसके बाद जर्मनी के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस से गम्भीर रूप से संक्रमित 11 मरीज़ों पर स्टडी की, तो इन मरीज़ों में मस्तिष्क से जुड़े यह सारे लक्षण दिखाई दिए, जबकि मस्तिष्क और स्पाइनल कॉर्ड में बहने वाले सेरिब्रोस्लाइनल फ्लूइड में कोरोना वायरस नहीं ही दिख रहा था।

इसी आधार पर जर्मन वैज्ञानिकों का मानना है कि कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज़ का इम्यून सिस्टम ही ऑटोएंटीबॉडी बना रहा है, और इसमें एंटीबॉडी शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं और ऊतकों पर हमला कर रही है। यह स्टडी 6 जुलाई को साइंस जर्नल medRxiv में प्रकाशित होने के बाद सामने आई है।

स्टडी के मुताबिक, कोरोना वायरस संक्रमण से बुरी तरह से संक्रमित इन सारे के सारे 11 मरीज़ों में ऑटोइम्यून सिस्टम बहुत तेज़ी से काम कर रहा था और इसका असर सीधा असर मस्तिष्क पर हो रहा था। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोरोना वायरस के कारण दिमाग में आ रही सूजन और उसके असर को एक्यूट डिसेमिनेटेड इंसिफेलोमाइलिटिस (ADEM) कहते हैं और इसके लक्षण युवाओं और किशोरों में दिख रहे हैं।

न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स में आई एक रिपोर्ट के अनुसार इस स्टडी में शामिल रिसर्चर डॉ क्रिश्चियाना फ्रेंक का कहना है कि संबंधित मरीज़ों में से किसी भी मरीज़ के दिमाग में बीमारी का कोई भी लक्षण नहीं था, लेकिन फिर भी दिमाग लगातार डैमेज होता जा रहा है।

डॉ क्रिश्चियाना फ्रेंक के मुताबिक़, "यह इस बात का संकेत है कि कोरोना वायरस संक्रमण से लड़ने के लिए मरीज़ों के शरीर में बन रही एंटीबॉडी ही शरीर के ख़िलाफ़ काम कर रही है।" वैसे वैज्ञानिक फ़िलहाल इस बात पर रिसर्च कर रहे हैं कि कोरोना वायरस कैसे अपने ही शरीर की एंटीबॉडीज़ को शरीर के ख़िलाफ़ काम करने के लिए उकसाता है।

इधर, यूनिवर्सिटी ऑफ़ लंदन में भी कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी और दिमाग के संबंध पर अध्ययन किया गया है। कोरोना वायरस से संक्रमित 43 मरीज़ों पर किए गए इस अध्ययन में देखा गया है कि कोरोना वायरस के कारण दिमाग की नसों में सूजन आ जाती है और ठीक होने के बाद भी इसका असर रहता है। वहीं, आशंका है कि कोरोना वायरस बीमारी ख़त्म होने के बाद भी लोग इससे परेशान रहेंगे।

दरअसल, अब वैज्ञानिकों को डर सता रहा है कि कोरोना वायरस, स्पेनिश फ्लू की तरह ही मस्तिष्क पर असर न करे। आपकी जानकारी के किए बता दें कि साल 1918 में फैले स्पेनिश फ्लू के बाद क़रीब 10 लाख लोगों को लगातार मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियां होती रहीं। इसी कारण से वैज्ञानिकों को डर है कि कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी की वैक्सीन आने के बाद भी बीमारी से रिकवर हो चुके मरीज़, दिमागी बीमारियों से प्रभावित रह सकते हैं।

वहीं, कनाडा की वेस्टर्न यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक एड्रियन ओवेन ने भी कोरोना वायरस के मस्तिष्क पर अटैक को लेकर चिन्ता ज़ाहिर की है और चेतावनी दी है। वैज्ञानिक ओवेन के मुताबिक़, "यदि कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज़ ठीक हो भी जाएं,तो भी वे मस्तिष्क की बीमारी से प्रभावित हो सकते हैं।" अब जबकि अभी तक कोरोना वायरस की कोई भी दवा या वैक्सीन नहीं बन पाई है, तो ऐसे में कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए योग, प्राणायाम और आयुर्वेद के ज़रिए अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं। साथ ही घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनें और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें।