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चीन का साथ अब पाकिस्तान को पड़ रहा है 'भारी'!

10 Jul 2020

पाकिस्तान की 'चीन परस्ती' से दुनिया की आर्थिक शक्तियां 'नाराज़'

JULY 10 (WTN) - एक असफल देश के रूप में पाकिस्तान पूरी दुनिया में जाना जाता है। भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने वाले पाकिस्तान की अंदरूनी राजनीति और विदेश नीति में विस्तारवादी मानसिकता वाले देश चीन की काफी दखलंदाज़ी है। अब जबकि कोरोना वायरस और पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद के कारण चीन के ख़िलाफ़ पूरी दुनिया में माहौल बनता जा था है। ऐसे में अब पाकिस्तान में भी धीरे-धीरे चीन विरोधी मानसिकता घर करती जा रही है।

जी हां, चीन की चाटूकारिता जिसे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान दोस्ती कहते हैं वो अब ख़ुद इमरान ख़ान को महंगी पड़ने वाली है। चीन के अंध समर्थन के कारण अब इमरान ख़ान विदेश और अपने ही देश पाकिस्तान में घिरते नज़र आ रहे हैं। दरअसल, चीन के समर्थन को लेकर पाकिस्तान के विदेश विभाग ने इमरान ख़ान को साफ़ चेतावनी दी है। पाकिस्तान के विदेश विभाग का कहना है कि यदि पाकिस्तान, चीन का इसी तरह से हर बात पर समर्थन करता रहा और ऐसा करना उसने नहीं छोड़ा, तो पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर अलगाव का सामना करना पड़ सकता है।

दरअसल, पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय वास्तविकता को जानता है कि कोरोना संकट और भारत से सीमा विवाद के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन काफी  आलोचनाओं का सामना कर रहा है। ऐसे में यदि पाकिस्तान, चीन के साथ अपने नीतियों की समीझा नहीं करता है और चीन की हर नीति का समर्थन करता है, तो ऐसा होने से विश्व की आर्थिक शक्तियां पाकिस्तान से नाराज़ हो सकती हैं। क्योंकि यही वैश्विक आर्थिक शक्तियां भारत के साथ टकराव के बाद चीन को वैश्विक स्तर आइसोलेट करने का काम कर रही हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दुनिया की आर्थिक शक्तियां अच्छी तरह से जानती हैं कि पाकिस्तान की नीति हमेशा से ही चीन की हर नीति के समर्थन की रही है। पाकिस्तान का राजनीतिक नेतृत्व और वहां की सेना हमेशा से ही चीन का आंख मूंदकर समर्थन करती रही है।

चीन की चाटूकारिता में व्यस्त पाकिस्तान को एक बड़ा झटका तब लगा, जब यूरोपीय यूनियन और ब्रिटेन ने पाकिस्तानी एयरलाइंस के विमानों को उड़ान भरने के लिए बैन कर दिया। हालांकि, पाकिस्तान ने यूरोपीय देशों को यह समझाने का प्रयास किया कि उसके पास योग्य पायलट हैं, लेकिन पाकिस्तान की हक़ीक़त जानते हुए यूरोपीय देशों ने अभी तक अपना फैसला नहीं बदला है।

बता दें कि यूरोपीय देश भारत के ख़िलाफ़ चीन के आक्रामक रुख के लिए राजनयिक स्तर पर चीन को अलग-थलग करने की कोशिशों में लगे हुए हैं। और पाकिस्तान के विदेश विभाग का मानना है कि चीन के समर्थन के कारण पाकिस्तान को यूरोपीय देशों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है और आगे भी करना पड़ सकता है। 

वहीं, हक़ीक़त यह है कि पाकिस्तान के राजनीतिक नेतृत्व को विदेश में ही नहीं बल्कि चीन की चाटूकारिता के कारण देश के अंदर भी भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। बता दें कि बलूचिस्तान और गिलगित बाल्टिस्तान में जिस तरह से चीन CPEC (China Pakistan Economic Corridor) के लिए पाकिस्तान के संसाधनों का शोषण कर रहा है उसे लेकर वहां के निवासियों में बहुत गुस्सा है। दरअसल, इस इलाके के लोगों को नौकरियां नहीं मिल रही हैं क्योंकि चीनी कंपनियां चीनी मज़दूरों से कम पैसे में काम कराना पसंद करती हैं। 

स्पष्ट है कि पाकिस्तान के राजनैतिक नेतृत्व और वहां की सेना की चीन परस्त नीतियों से पाकिस्तान को न केवल विदेश में फजीहत का सामना करना पड़ रहा है बल्कि पाकिस्तान के अंदर भी चीन विरोधी मानसिकता बढ़ती जा रही है। यदि समय रहते पाकिस्तान ने चीन की चाटूकारिता से ख़ुद को अलग नहीं किया तो उसे गम्भीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।