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कोरोना वायरस पर सामने आ रहा है चीन का 'झूठ'

13 Jul 2020

COVID-19 की सच्चाई सामने लाने पर 'आवाज़ दबाने' की कोशिश करती चीन की वामपंथी सरकार

JULY 13 (WTN) - जैसा कि आप जानते ही हैं कि चीन के वुहान शहर से फैली कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी (COVID-19) इस समय मानव सभ्यता के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। इस लेख को लिखे जाने तक, कोरोना वायरस संक्रमण से अभी तक क़रीब 5,71,660 लोगों की मौत हो चुकी है और क़रीब 1,30,41,698 लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं।

साफ है कि कोरोना वायरस इस समय की सबसे बड़ी समस्या है। इससे न केवल लाखों लोगों की जान जा चुकी है बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को भी बहुत बड़ा झटका लगा है। इस सबके बीच, अमेरिका समेत दुनिया के कई देश, COVID-19 महामारी पूरी दुनिया में फैलने के लिए चीन को दोषी मान रहे हैं। आरोप तो यह भी लगाया जा रहा है कि कोरोना वायरस वुहान स्थित एक लैब से लीक हुआ जैविक हथियार है।

हालांकि, COVID-19 पर तमाम तरह के आरोपों के बीच, चीन की वामपंथी सरकार का कहना है कि कोरोना वायरस वुहान शहर से फैला ज़रूर है और वो भी किसी लैब से नहीं बल्कि एक सी-फूड मार्केट से। साथ ही चीन की वामपंथी सरकार का कहना है कि कोरोना वायरस वुहान शहर से 'उत्पन्न' नहीं हुआ है क्योंकि यह वायरस वुहान शहर से काफी पहले यूरोप के कुछ देशों के सीवेज में पाया गया था।

अब जबकि COVID-19 पर चीन की वामपंथी सरकार पर लापरवाही बरतने, सही समय पर दुनिया को जानकारी नहीं देने और ग़ैर ज़िम्मेदाराना रवैया अपनाने के आरोप लग रहे हैं, हॉन्ग कॉन्ग की एक प्रसिद्ध वायरलोलॉजिस्ट ने COVID-19 पर चीन पर कई आरोप लगाए हैं और काफी सनसनीखेज खुलासे किए हैं।

हॉन्ग कॉन्ग से 'जान बचाकर' अमेरिका पहुंचीं हॉन्ग कॉन्ग स्कूल ऑफ़ पब्लिक हेल्थ में वायरोलॉजी और इम्यूनोलॉजी की विशेषज्ञ लि-मेंग यान ने खुलासा किया है कि कोरोना वायरस के बारे में चीन काफी पहले से जानता था, लेकिन काफी समय बाद चीन ने कोरोना वायरस के बारे में दुनिया को जानकारी दी और यह सब सरकार के सर्वोच्च स्तर पर किया गया।

फॉक्स न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में यान ने कहा कि COVID-19 महामारी की शुरुआत में उनकी रिसर्च को उनके सुपरवाइजर्स ने भी इग्नोर किया। यदि इसे इग्नोर नहीं किया जाता, तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी। लि-मेंग यान का इस बारे में कहना है, "चीन सरकार ने विदेशी और यहां तक की हॉन्ग कॉन्ग के विशेषज्ञों को रिसर्च में शामिल करने से इनकार कर दिया। जो डॉक्टर्स और शोधकर्ता खुले रूप से वायरस पर चर्चा कर रहे थे उन्हें 'चुप' करवा दिया गया। जिसके बाद वुहान के डॉक्टर्स और शोधकर्ताओं ने चुप्पी साध ली है और वहीं चेतावनी भी दी गई कि उनसे कोई भी ब्योरा ना मांगा जाए।"

यान का कहना है कि चीन की वामपंथी सरकार ने साफ कह दिया कि डॉक्टर्स को वायरस के बारे में बात नहीं करना है, लेकिन मास्क पहनने की ज़रूरत है। लेकिन इसके बाद भी वायरस का मानव से मानव में संक्रमण तेज़ी से बढ़ने लगा।  लि-मेंग यान की बातों से साफ है कि चीन की वामपंथी सरकार 'शायद' कोरोना वायरस के बारे में बहुत कुछ जानती थी, लेकिन उसने इस जानकारी को 'छिपाकर' रखा और दुनिया को इसकी जानकारी नहीं दी। चीन की वामपंथी सरकार की इसी 'लापरवाही' और 'ग़ैर ज़िम्मेदाराना' रवैये के कारण कोरोना वायरस पूरी दुनिया में फैल गया और अभी तक लाखों लोग मारे जा चुके हैं। 

लेकिन जैसा कि आप जानते ही हैं कि चीन में किसी को भी अभिव्यक्ति की आज़ादी नहीं है। इसी कारण से लि-मेंग यान को वामपंथी सरकार के 'ख़िलाफ़ बोलने' की क़ीमत चुकानी पड़ रही है। यान का कहना है कि उन्हें अपनी जान का ख़तरा है। सरकार के ख़िलाफ़ बोलने के कारण ही यान को काफी 'विपरीत परिस्थितियों' में वहां से भागना पड़ा।

यान के मुताबिक़, "यदि मैं पकड़ी जाती तो जेल में डाल दी जाती या 'ग़ायब' कर दी जाती या 'मार' दी जाती। चीन की सरकार मेरी प्रतिष्ठा को धूमिल करने की कोशिश कर रही है और चीन की वामपंथी सरकार के 'गुंडे' मुझे चुप कराने के लिए साइबर अटैक कर रहे हैं।" ख़ैर, जब चीन की वामपंथी सरकार लोकतंत्र समर्थक आंदोलनकारियों को सेना के टैंकों से मरवा सकती है, तो लि-मेंग यान की 'आवाज़ को दबाना' चीन की वामपंथी सरकार के लिए काफी छोटी सी बात है। लेकिन चीन की वामपंथी सरकार को एक न एक दिन दुनिया के सामने 'सच' स्वीकार करना ही होगा।