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यदि अभी भी नहीं सुधरे तो बड़े पैमाने पर कम्युनिटी ट्रांसमिशन का खतरा!

14 Jul 2020

कई देशों में कोरोना संक्रमण रोकने में नाकामी से WHO 'चिंतित'

JULY 14 (WTN) - इस समय मानव सभ्यता कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी (COVID-19) के सामने अपने अस्तित्व की एक बड़ी लड़ाई लड़ रही है। चीन के वुहान शहर से फैली कोरोना वायरस संक्रमण महामारी दिनों-दिन विकराल रूप धारण करती जा रही है। इस लेख को लिखे जाने तक, कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी से अभी तक क़रीब 5,75,601 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, अभी तक कोरोना वायरस से 1,32,40,715 लोग संक्रमित हो चुके है।

लेकिन वहीं आप यह भी जानते हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी की अभी तक कोई भी दवा या वैक्सीन नहीं बन पाई है। हालांकि, दुनिया भर के वैज्ञानिक दिन-रात पूरी कोशिश कर रहे हैं कि COVID-19 की जल्द से वैक्सीन या दवा बन जाए। लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी अभी तक वैज्ञानिकों को कोई भी ठोस सफलता हासिल नहीं हो सकी है।

ख़ैर, अब जबकि कोरोना वायरस संक्रमण की कोई भी वैक्सीन या दवा नहीं बन पाई है। ऐसे में संक्रमण से खुद को बचाने के लिए मास्क पहनना और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे उपाय अपनाने बेहद ज़रूरी है। लेकिन देखा जा रहा है कि कई देशों के नागरिक और वहां का राजनीतिक नेतृत्व कोरोना वायरस को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं और न ही उससे बचने के उपायों पर सही दिशा में काम कर रहे हैं। 

इसी कारण से कोरोना वायरस के मामलों को कम करने में असफल रहने के लिए  WHO (Wotld Health Organization) यानि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कई देशों की सरकारों की 'आलोचना' की है। WHO के प्रमुख डायरेक्टर जनरल टेड्रोस एडहैनम घेब्रियेसुस का कहना है कि कई देशों की सरकारें कोरोना वायरस को लेकर अलग-अलग संदेश दे रही हैं और लोगों का भरोसा खो रही हैं। हालांकि, WHO प्रमुख ने सरकारों की आलोचना के दौरान किसी विशेष देश या उसके राजनेता का नाम नहीं लिया।

अब जबकि कोरोना वायरस के मामले काफी तेज़ी से बढ़ते जा रहे हैं। तो ऐसे में WHO ने चेतावनी देते हुए स्पष्ट कहा है कि कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते मामलों को रोकने में 'नाकाम' रहने से निकट भविष्य में जल्दी ही सामान्य ज़िन्दगी में लौट आना फिलहाल सम्भव नहीं दिख रहा है। 

दरअसल, WHO कई देशों की सरकारों से इसलिए नाराज़ है क्योंकि कोरोना वायरस संक्रमण महामारी को लेकर कई सारे देश 'ग़लत दिशा' में आगे बढ़ रहे हैं। वहीं, कुछ देश संक्रमण रोकने के लिए पर्याप्त उपाय ही नहीं कर रहे हैं। वैसे WHO का मानना है कि किसी भी देश की सरकार के लिए कोरोना वायरस महामारी को रोकना काफी मुश्किल भरा काम है। 

WHO का यह भी मानना है कि कोरोना वायरस संक्रमण फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन जैसे कठिन उपाय करने होते हैं। लेकिन लॉक डाउन से पाबंदियां लगाने से आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन काफी हद तक प्रभावित होता है। लेकिन यदि लोगों ने समझदारी नहीं दिखाई, तो कोरोना वायरस काफी लम्बे समय तक लोगों की जान लेता रहेगा। यदि अभी भी कई देशों की सरकारों और वहां के नागरिकों ने हालात की गंभीरता नहीं समझी, तो कई देशों में बड़े पैमाने पर कम्युनिटी ट्रांसमिशन होने से कोई नहीं रोक सकेगा।

दरअसल, अभी तक कई देशों के लोगों ने कोरोना वायरस को गंभीरता से लेना अभी तक शुरू ही नहीं किया है और भारत और अमेरिका जैसे देश इसमें शामिल हैं। देखा जा रहा है कि मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग को भारत और अमेरिका में गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। यहां तक कि अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प तक सार्वजनिक जगहों पर काफी दिनों के बाद पहली बार मास्क पहने नज़र आए। अब यदि कई देशों के राजनीतिक नेतृत्व और नागरिकों ने अभी भी कोरोना वायरस की भयावह स्थिति को नहीं समझा, तो आने वाले समय में और भी विकराल स्थिति का सामना करने हम सभी को तैयार रहना चाहिए।