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कोरोना वायरस संक्रमण से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं इम्यून सिस्टम के टी सेल्स

01 Aug 2020

अध्ययन का दावा: किसी अन्य संक्रमण से उपजे टी सेल्स कोरोना वायरस संक्रमण के ख़िलाफ़ भी हो सकते हैं कारगर

AUG 01 (WTN) - चीन के वुहान शहर से फैली कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी मानव सभ्यता के सामने इस समय की सबसे बड़ी चुनौती है। इस लेख को लिखे जाने तक, कोरोना वायरस संक्रमण के कारण अभी तक पूरी दुनिया में क़रीब 6,83,491 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, अमेरिका, ब्राज़ील और भारत जैसे बड़े देशों में हर रोज़ हज़ारों की तादात में लोग कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी से संक्रमित हो रहे हैं।

ख़ैर, वहीं आप जानते ही हैं कि अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी की कोई भी प्रामाणिक वैक्सीन अभी तक उपलब्ध नहीं है। हालांकि, दुनिया भर के वैज्ञानिक कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी की वैक्सीन बनाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। लेकिन, दुर्भाग्य से इस दिशा में कोई भी ठोस सफलता हासिल नहीं हो सकी है। हालांकि, रूस के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि वे कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने में सफल हो गए हैं, लेकिन देखना होगा कि रूस के वैज्ञानिकों के दावों में कितनी सच्चाई है?

ख़ैर, इस सबके बीच, कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी पर लगातार शोध और अध्ययन जारी हैं। इधर, एक अध्ययन में दावा किया गया है कि कुछ लोग जो कभी भी SARS‑CoV‑2 के सम्पर्क में नहीं आए, लेकिन उनका शरीर इस वायरस से लड़ने के लिए कुछ हद तक तैयार हो सकता है और ऐसे लोगों में कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर बीमारी की गम्भीरता संभवत: कम हो सकती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि ऐसे लोगों के शरीर का इम्यून सिस्टम कुछ हद तक ऐसे संक्रमण से पहले ही जूझ चुका होता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Nature जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, अध्ययन करने वालों ने जर्मनी के ऐसे 68 वयस्कों के सैंपल की जांच की जो कभी भी कोरोना वायरस के सम्पर्क में नहीं आए थे। इस जांच में पाया गया कि इन लोगों में से 35 प्रतिशत लोगों में ऐसे टी सेल्स पाए गए जो कोरोना वायरस से रिएक्टिव होते हैं।

दरअसल, वैज्ञानिकों के अनुसार, टी सेल्स मानव इम्यून सिस्टम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं और यह शरीर को संक्रमण से बचाते है। अध्ययन में 35 प्रतिशत लोगों में टी सेल्स रिएक्टिविटी मिलने के बाद ऐसा समझा जा रहा है कि इन लोगों का शरीर पहले कभी कोरोना वायरस संक्रमण जैसे ही संक्रमण का सामना कर चुका होगा।

अध्ययन के अनुसार, जिन लोगों के इम्यून सिस्टम में टी सेल्स पाए गए हैं वे लोग पहले ज़रूर कोरोना वायरस फैमिली के किसी अन्य वायरस के सम्पर्क में आए होंगे, और इसी कारण से इनके शरीर में टी सेल्स मौजूद हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक़, यदि मिलते जुलते किसी और संक्रमण से पैदा हुए टी सेल्स अगर किसी नई बीमारी में रक्षा करते हैं तो इसे ही क्रॉस रिएक्टिविटी कहते हैं।

हालांकि, अध्ययन करने वालों का कहना है कि अभी ये पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाया है कि पहले से मौजूद क्रॉस रिएक्टिव टी सेल्स, कोरोना वायरस से बचाने में कितने कारगर साबित हो सकते हैं? ख़ैर, जब तक कोरोना वायरस संक्रमण की कोई प्रामाणिक वैक्सीन नहीं बन जाती है या फिर इसके केस आने बहुत कम नहीं हो जाते हैं तब तक, घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनें और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। वहीं, डॉक्टर की सलाह से योग, प्रणायाम और आयुर्वेद के ज़रिए ख़ुद की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं। साथ ही, विटामिन-डी की शरीर में आपूर्ति के लिए कम से कम 20 मिनिट तक सूर्य की रोशनी के प्रत्यक्ष सम्पर्क में रहें।