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10 सीटों ने ‘बिगाड़ा’ भाजपा का समीकरण, नहीं तो शिवराज सिंह चौहान बनते मुख्यमंत्री!

14 Dec 2018
नोटा के कारण 10 सीटों पर भाजपा की हुई 2,000 से कम वोटों से हार
 

DEC 14 (WTN) – मध्य प्रदेश में लगातार 15 सालों तक सरकार में रहने के बाद भाजपा की विधानसभा चुनाव में हार हुई जिसके बाद शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद प्रदेश के नये मुख्यमंत्री के रूप में छिन्दवाड़ा सांसद कमलनाथ शपथ लेंगे। 10 साल से भी ज़्यादा समय तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान एक बार फ़िर से मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते, यदि उन 10 सीटों पर भाजपा कार्यकर्ता मेहनत कर लेते जहां पर कि पार्टी की हार 2,000 से भी कम वोटों से हुई।
 
राज्य की 10 सीटें ऐसी हैं जहां पर कि भाजपा प्रत्याशी की 2,000 से कम वोटों से हार हुई है और इन सीटों पर भाजपा प्रत्याशी की हार से ज़्यादा वोट नोटा को मिले हैं। इन सीटों पर यदि भाजपा कार्यकर्ता मतदाताओं को नोटा के बजाय भाजपा के लिए वोट देने के लिए प्रेरित करते, तो शायद इन सीटों पर भाजपा प्रत्याशी की जीत होती और एक बार फ़िर से शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री बनते।
आइये आपको बताते हैं कि ये 10 सीटें कौन सी हैं जहां पर भाजपा प्रत्याशी की 2,000 से कम वोटों से हार हुई और हार के अंतर से ज़्यादा वोट नोटा को मिले।
 
दमोह सीट से कांग्रेस के राहुल सिंह लोधी ने भाजपा के जयंत मलैया को सिर्फ़ 798 वोटों से हराया, जबकि यहां पर नोटा को 1,299 वोट मिले।
 
गुन्नौर विधानसभा सीट से कांग्रेस के शिवदयाल बागारी ने भाजपा के राजेश वर्मा को 1,984 वोटों से हराया, जबकि इस सीट पर 3,734 लोगों ने नोटा का बटन दबाया।
 
राजपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के बाला बच्चन ने भाजपा के अंतर सिंह देवीसिंह पटेल को 932 वोटों के अंतर से हराया, इस सीट पर 2,485 लोगों ने नोटा का बटन दबाया।
 
राजनगर विधानसभा सीट से कांग्रेस के विक्रम सिंह ने भाजपा के अरविन्द पटेरिया को सिर्फ़ 732 वोटों से हराया, जबकि इस सीट पर 2,485 लोगों ने नोटा को चुना।
 
बुरहानपुर ज़िले की नेपानगर विधासनभा सीट पर कांग्रेस की उम्मीदवार सुमित्रा देवी कासडेकर ने भाजपा की मंजू राजेंद्र दादू को 1264 वोटों से शिकस्त दी, वहीं इस सीट पर 2,551 लोगों ने नोटा का बटन दबाया।
 
सुवासरा विधानसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार डांग हरदीप सिंह ने भाजपा के राधेश्याम नंदलाल पाटीदार को सिर्फ़ 350 मतों से हराया। सुवासरा सीट पर 2,976 लोगों ने नोटा का बटन दबाया।
 
मांधाता विधानसभा सीट से कांग्रेस के नारायण पटेल ने भाजपा के नरेंद्र सिंह तोमर को 1,236 वोटों के अंतर से हराया, जबकि यहां पर 1,575 लोगों ने नोटा का बटन दबाया।
 
राजगढ़ ज़िले की ब्यावरा विधानसभा सीट पर कांग्रेस के गोवर्धन सिंह दांगी ने भाजपा के नारायण सिंह पंवार को 826 वोटों से हराया, जबकि इस सीट पर 1,481 लोगों ने नोटा का बटन दबाया।
 
ग्वालियर-दक्षिण सीट पर कांग्रेस के प्रवीण पाठक ने भाजपा के नारायण सिंह कुशवाहा को 121 वोटों से हराया, इस सीट पर 1,550 लोगों ने नोटा का बटन दबाया।
 
जबलपुर-उत्तर विधानसभा सीट से कांग्रेस के विनय सक्सेना ने भाजपा के शरद जैन को सिर्फ़ 578 वोटों से शिकस्त दी। इस सीट पर 1209 लोगों ने नोटा का बटन दबाया।
 
विधानसभा चुनाव के परिणाम में कांग्रेस ने 114 तो भाजपा ने 109 सीटों पर जीत हासिल की। यदि इन 10 सीटों पर भाजपा प्रत्याशी को जीत हासिल होती, तो शायद आज मध्य प्रदेश की राजनीतिक स्थिति कुछ और ही होती। यदि भाजपा इन 10 सीटों पर जीत हासिल कर लेती, तो भाजपा के पास इस समय 119 सीटें होतीं और कांग्रेस के पास 104 सीटें।
 
यानि कि यदि इन 10 सीटों पर भाजपा कार्यकर्ता मतदाताओं को भाजपा के पक्ष में मतदान करने के लिए प्रेरित कर लेते तो 10 सीटों पर जीत के साथ ही शिवराज सिंह चौहान चौथी बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बनते, लेकिन ऐसा हो ना सके और इन 10 सीटों पर बूथ मैनेटमेंट में कमी के कारण भाजपा को हार का सामना करना पड़ा और भाजपा बहुमत से दूर रह गई।