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थायराइड के लिए नहीं है लाइफस्टाइल या खानपान जिम्मेदार, महिलाओ में बीमारी की 10 गुना ज्यादा संभावना

24 May 2019

99 प्रतिशत मरीज खा सकते हैं मर्जी का खाना

भोपाल, 24 मई, 2019। यदि आप सोचते हैं कि सही खानपान व व्यवस्थित लाइफस्टाइल के बावजूद आपको थायराइड की बीमारी कैसे हो गई तो आप जान लें कि यह लाइफस्टाइल या खानपान से जुड़ी बीमारी नहीं है। यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें हमारे रक्त में रक्षातंत्र के रूप में काम करने वाली सफेद रक्तकणिकाएं अपने ही शरीर के अंगों को दुश्मन समझ उन पर आक्रमण कर या तो उन्हें खत्म कर देती हैं या फिर उनकी कार्यप्रणाली को गड़बड़ा देती हैं। पुरूषों की तुलना में महिलाओं में इस बीमारी के होने की दस गुना ज्यादा संभावना रहती है। गांवों की तुलना में शहरी लोगों में यह बीमारी अधिक देखी जाती है।

उक्त आशय की जानकारी आज विश्व थायराइड दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित एक पत्रकार वार्ता में शहर के जाने माने थायराइड रोग विशेषज्ञ डॉ. सचिन चित्तावर
 एवं डॉ प्रिया भावे चित्तावर ने दी। उन्होंने बताया कि थायराइड ग्रंथि एक तितली के आकार की अंतःस्रावी ग्रंथि होती है जो गर्दन के निचले हिस्से में स्थित होती है। थायराइड का काम थायरायड हार्माेन बनाना है, जो रक्त में स्रावित होता है और फिर शरीर के प्रत्येक ऊतक में पहुंच जाता है। थायराइड हार्माेन शरीर को ऊर्जा का उपयोग करने, गर्म रहने और मस्तिष्क, हृदय, मांसपेशियों और अन्य अंगों को काम करने में मदद करता है।



डॉ. चित्तावर ने बताया कि थायराइड रोग में कई विकार शामिल हैं, लेकिन हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायरायडिज्म दो सबसे आम हैं। भारत में 4 करोड़ 20 लाख से अधिक लोग विभिन्न तरह की थायराइड बीमारियाों से ग्रसित हैं। उन्हांने कहा कि थायराइड रोगियां में खानपान को लेकर बहुत सी भ्रांतियां  व्याप्त हैं जैसे कि उन्हें पत्ता गोभी फूल गोभी, टमाटर या दूध व सोया से बने पदार्थ आदि नहीं  खाना चाहिए। लेकिन सच तो यह है कि 100 में से 99 मरीज सबकुछ खा सकते हैं, बशर्ते वे डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा का नियमित सेवन कर रहे हों।

थायराइड रोग के लक्षणों  के बारे में चर्चा करते हुए डॉ. चित्तावर ने कहा कि अच्छी भूख के बावजूद वजन कम होना, गर्दन मोटी होते जाना, हृदय गति में वृद्धि, कम मासिक धर्म, उच्च रक्तचाप, पसीना अधिक आना, बार-बार मल त्यागना, घबराहट और हाथ कांपना और वजन कम होना इसके लक्षण हैं। पारिवारिक इतिहास, टाइप 2 डायबिटीज, तनाव, डाउन या टर्नर सिंड्रोम आदि वजहों से यह बीमारी हो सकती है।

उन्होंने आगे कहा कि 35 वर्ष की आयु के बाद प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जांच करानी चाहिए तथा हर पांच साल में इस जांच को दोहराते रहना चाहिए। यदि आपको थायराइड रोग का पता चलता है, तो यह महत्वपूर्ण है कि आप इसे गंभीरता से लें और डॉक्टर आपको जो भी निर्देश दें उसका पालन करें। यदि थाइराइड की बीमारी को बिना उपचार के छोड़ दिया जाता है, तो थायरॉयड स्ट्रोक, हृदय रोग, बांझपन, अल्जाइमर और अंततः मृत्यु का कारण बन सकती हैं। अपनी थायरॉयड ग्रंथि को सबसे अच्छी स्थिति में रखने के लिए, आयोडीन और सेलेनियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ खाए। आप आयोडीन युक्त नमक और समुद्री भोजन खाकर ऐसा कर सकते हैं।- Window To News