HOME WORLD INDIA BHOPAL BUSINESS ENTERTAINMENT SCIENCE & TECHNOLOGY SPORTS HEALTH
WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RECIPES DRINKS FUN FACTS WTN HINDI
EDUCATION LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE BIG MEMSAAB OPINION & INTERVIEW BrahMos
ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
BREAKING NEWS

सूर्य के 'लॉकडाउन' से 'ज़्यादा' घबराने की नहीं है ज़रूरत; हर 11 साल में होती है ऐसी घटना

16 May 2020

सोलर मिनिमम से चिंता में सोलर वैज्ञानिक; भीषण गर्मी, सूखे और ज्वालामुखी की जताई आशंका

MAY 16 (WTN) - जैसा कि आप जानते ही हैं कि पृथ्वी पर जीव जंतुओं और पेड़ पौधों का जीवन सूर्य के कारण ही सम्भव है। सूर्य से आने वाली किरणों से ही पृथ्वी पर करोड़ों सालों से सजीव जीवन सामान्य रूप से चल रहा है। करोड़ों सालों से पृथ्वी पर सूर्य की ऊर्जा नियमित रूप से आ रही है। लेकिन क्या हो यदि सूर्य से आने वाली ऊर्जा कम या ज़्यादा हो जाए? स्वाभाविक है कि ऐसा होने पर पृथ्वी पर सजीव जीवन का क्या होगा, इसकी कल्पना करना तक मुश्किल है।

दरअसल, इन दिनों सोलर वैज्ञानिकों को सूर्य पर घट रही एक घटना ने चिंता में डाल दिया है। सोलर वैज्ञानिकों के मुताबिक़, इन दिनों सूर्य पर कुछ ऐसी गतिविधियां हो रही हैं जिसके कारण पृथ्वी पर आने वाली सूर्य की किरणों में कमी देखी जा रही है। सामान्य भाषा में कहा जाए तो इन दिनों सूर्य पर भी लॉकडाउन चल रहा है जिसे वैज्ञानिक भाषा में सोलर मिनिमम (Solar Minimum) कहा जाता है।

आपकी जानकरी के लिए बता दें कि सोलर मिनिमम की घटना के दौरान सूर्य की सतह पर सामान्य रूप से होने वाली गतिविधियां अपने आप कम होने लगती हैं। सोलर मिनिमम के बारे में सोलर वैज्ञानिकों का कहना है कि इस दौरान अब पृथ्वी की सतह पर सूर्य की सूरज की किरणें पहली की तुलना में कम आएंगी। बता दें इस दौरान सूर्य की किरणें रिकॉर्ड स्तर पर कम होंगी और सनस्पॉट बिल्कुल ग़ायब हो जाएगा।

सोलर वैज्ञानिकों के अनुसार, सूर्य के सनस्पॉट बता रहे हैं कि इस बार सोलर मिनिमम पहले की तुलना में काफ़ी ज़्यादा गहरा रहने वाला है। सोलर मिनिमम के कारण सूर्य की मैग्नेटिक फील्ड काफ़ी कमज़ोर पड़ जाएगी और सोलर सिस्टम में ज़्यादा  कॉस्मिक रेज आ जाएंगी। सोलर वैज्ञानियों के मुताबिक, ज़्यादा मात्रा में कॉस्मिक रेज पृथ्वी के ऊपरी वातावरण के इलेक्ट्रो केमिस्ट्री को प्रभावित करेंगी और इसके कारण तेज़ बिजलियां कड़केंगी जिसका सीधा असर मौसम पर पड़ेगा।

इधर, नासा (NASA) के वैज्ञानिकों ने भी सोलर मिनिमम को लेकर चिंता जताई है। नासा के वैज्ञानिकों का कहना है कि सोलर मिनिमम से भीषण ठंड पड़ सकती है। वहीं फसलों को भी काफी नुकसान हो सकता है। सोलर मिनिमम के कारण भूकंप, सूखा और भयावह ज्वालामुखी जैसी आपदाएं भी आ सकती हैं।

दरअसल, नासा के वैज्ञानिकों की चिंता का कारण यह है कि उन्हें डर है कि कहीं इस बार का सोलर मिनिमम 'डाल्टन मिनिमम" जैसा न हो। आपकी जानकारी के लिए बता दें 1790 से 1830 के दौरान घटी डाल्टन मिनिमम की घटना के दौरान काफ़ी तेज़ ठंड पड़ी थी, जिससे फसलों को काफ़ी नुकसान पहुंचा था। वहीं सूखा और भयावह ज्वालामुखी जैसी आपदाओं से काफी जनहानि हुई थी।

लेकिन वहीं रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी के वैज्ञानिकों के अनुसार, सोलर मिनिमम से ज़्यादा घबराने की कोई भी ज़रूरत नहीं है। इन वैज्ञानिकों के अनुसार, सूर्य की सतह पर हर 11 साल में ऐसी ही घटनाएं घटित होती रहती हैं। दरअसल, यह सूर्य की प्रकृति का चक्र है और इससे ज़्यादा डरने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि कुछ दिनों में सूर्य का चुम्बकीय क्षेत्र अपने पुराने स्वरूप में लौट आता है।