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मध्य प्रदेश में भाजपा के 12 मौजूदा सांसदों का कट सकता है टिकट

19 Mar 2019
मध्य प्रदेश में ‘सर्वेक्षण’ के आधार पर टिकट वितरण करेगी भाजपा

MAR 19 (WTN) – 2019 के लोकसभा चुनाव में जीत के लिए भाजपा हर तरह की रणनीति अपना रही है, ताकि एक बार फ़िर से सरकार बनाई जा सके। चुनाव में जीत के लिए सबसे अहम होता है टिकट वितरण, और कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के फॉर्मूले के हिसाब से टिकट वितरण करने की तैयारी में है। पिछले लोकसभा चुनाव की तरह ही इस बार फ़िर से बहुमत हासिल करने के लिए भाजपा का पूरा ध्यान हिन्दी भाषा राज्यों पर है। यदि बात करें मध्य प्रदेश की, तो साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने राज्य की 29 में से 27 सीटों पर जीत हासिल की थी।  
 
लेकिन लोकसभा चुनाव से ठीक पहले, मध्य प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार ने पार्टी को टिकट वितरण के तरीक़े पर एक बार फ़िर से सोचने पर मज़बूर कर दिया है। दरअसल पिछले साल नवम्बर में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को राज्य में 15 सालों के बाद हार का सामना करना पड़ा था। कहा जाता है कि भाजपा की हार के पीछे सबसे बड़ा कारण था टिकट वितरण में पार्टी सर्वेक्षण को अनदेखा करना।
 
जानकारी के मुताबिक़, मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी के सर्वेक्षण में सिफारिश की गई थी कि भाजपा के 165 विधायकों में से कम से कम 80 विधायकों का प्रदर्शन खराब है, जिसके कारण उन्हें टिकट नहीं देना चाहिए। लेकिन भाजपा ने सर्वेक्षण को अनदेखा कर दिया और जिसके बाद मध्य प्रदेश में भाजपा को 15 सालों के बाद हार का सामना करना पड़ा। हार भी ऐसी थी कि शिवराज सिंह चौहान सरकार के 13 मन्त्रियों को जीत नसीब नहीं हो सकी।
 
सूत्रों के मुताबिक़, विधानसभा चुनाव से सबक लेते हुए भाजपा अब लोकसभा चुनाव में सर्वेक्षण के आधार पर टिकट वितरण करने जा रही है, जिसके बाद कहा जा रहा है कि भाजपा लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश के 12 मौजूदा सांसदों का टिकट काट सकती है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, भाजपा के 12 मौजूदा सांसदों का प्रदर्शन सर्वेक्षण में संतोषजनक नहीं रहा है। सर्वेक्षण के अनुसार यदि इन सांसदों को फ़िर से टिकट दिया गया, तो इन सीटों पर मोदी लहर के बावजूद भाजपा को जीत हासिल करने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने मध्य प्रदेश में तत्कालीन 18 मौजूदा सांसदों को दोबारा टिकट नहीं दिया था, और उसका फायदा यह रहा था कि भाजपा ने राज्य की 29 में से 27 सीटों पर जीत हासिल की थी और कांग्रेस मध्य प्रदेश की सिर्फ़ दो सीटों, छिन्दवाड़ा और गुना सीट पर ही जीत दर्ज कर सकी थी। विधानसभा चुनाव में हार के बाद यदि भाजपा सर्वेक्षण के आधार पर टिकट वितरित करती है, तो मौजूदा 12 सांसदों के टिकट कट सकते हैं, ऐसे में कहा जा सकता है कि लोकसभा चुनाव में जीत के लिए भाजपा सांसदों के नाम पर नहीं बल्कि उनके नाम पर ही टिकट देगी।