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मध्य प्रदेश में 15 भाजपा सांसद संघ के सर्वे में ‘फ़ेल’!

14 Feb 2019
मध्य प्रदेश में भाजपा सांसदों का प्रदर्शन ‘निराशाजनक’; लोकसभा चुनाव में सिर्फ़ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम और काम का ‘सहारा’!

FEB 14 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि लोकसभा चुनाव के लिए कुछ ही समय शेष बचा है, ऐसे में सभी राजनीतिक दल चुनाव के लिए अपनी-अपनी ‘रणनीतियां’ बनाने में लगे हुए हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए सत्ताधारी भाजपा की बात करें तो तीन राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में हार के बाद भाजपा जरा ‘चिंतित’ और ‘सहमी’ हुई है। वहीं यदि मध्य प्रदेश की बात करें तो कहा जाता है कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव में संघ के ‘सर्वे’ और ‘सलाह’ को नज़रअंदाज करते हुए टिकटों का वितरण किया था जिसके कारण भाजपा को हार का सामना करना पड़ा।
 
लेकिन अब भाजपा लोकसभा चुनाव में किसी भी तरह से संघ की ‘सलाह’ को ‘नज़रअंदाज’ करने के मूड में नहीं दिख रही है। जैसा कि आप जानते हैं कि भाजपा को हराने के लिए पूरा विपक्ष जहां ‘एक’ हो रहा है, तो ऐसे में भाजपा जानती है कि उसे अपने ‘दम’ पर ही लोकसभा चुनाव में विपक्ष का सामना करना होगा और विपक्ष का सामना भाजपा तभी अच्छी तरह से कर सकती है जब उसके पास लोकसभा चुनाव में ‘दमदार’ प्रत्याशी हो।
 
यदि दिल्ली की सत्ता पर काबिज होना है तो मध्य प्रदेश की 29 सीटें काफ़ी ‘मायने’ रखती हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने राज्य की 29 में से 27 सीटों पर जीत हासिल की थी। लेकिन यदि संघ के सर्वे की मानें तो इस बार भाजपा के लिए मध्य प्रदेश में ‘मुश्किलें’ खड़ी हो सकती हैं, क्योंकि राज्य की 15 सीटों पर भाजपा सांसदों की छवि अच्छी नहीं है।
 
जानकारी के मुताबिक, संसदीय क्षेत्र में विकास कार्य नहीं होने, सांसद की कार्यकर्ताओं और आम जनता से दूरी और दूसरे अन्य कारणों से राज्य की 15 सीटों पर भाजपा की स्थिति ‘चिंताजनक’ बनी हुई है। कहा जा सकता है कि विधानसभा चुनाव में संघ की ‘सलाह’ को दरकिनार करने के बाद हार का सामना करने वाली भाजपा अब लोकसभा चुनाव में संघ की सलाह को ‘नज़रअंदाज’ करने का जोखिम नहीं उठाना चाहेगी।
 
संघ के सर्वे के मुताबिक़ जिन सांसदों की छवि उनके संसदीय क्षेत्र में ‘कमजोर’ हैं उनके नाम इस तरह से हैं; मुरैना सांसद अनूप मिश्रा, टीकमगढ़ सांसद वीरेन्द्र खटीक, मन्दसौर सांसद सुधीर गुप्ता, धार सांसद सावित्री ठाकुर, भोपाल सांसद आलोक संजर, विदिशा सांसद सुषमा स्वराज, शहडोल सांसद ज्ञान सिंह, उज्जैन सांसद चिन्तामणि मालवीय, सागर सांसद लक्ष्मीनारायण यादव, भिण्ड सांसद भागीरथ प्रसाद, खजुराहो सांसद नागेन्द्र सिंह, बालाघाट सांसद बोध सिंह भगत, खण्डवा सांसद नन्दकुमार सिंह चौहान, दमोह सांसद प्रह्लाद पटेल और देवास सांसद मनोहर उंटवाल।
 
अब देखना होगा कि लोकसभा चुनाव में टिकट वितरण के दौरान भाजपा, संघ की ‘सलाह’ को कितनी तरजीह देती है। यह सच है कि भाजपा लोकसभा चुनाव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘नाम’ और ‘काम’ पर लड़ेगी, और उसे उम्मीद है कि मतदाता इन्हीं दो बातों को देखकर मतदान करेंगे। लेकिन भाजपा को इस बात को नहीं भूलना चाहिए कि किसी भी सीट पर ‘कमज़ोर’ प्रत्याशी भाजपा के मंसूबों पर पानी फेर सकता है। अब जबकि पूरा विपक्ष मिलकर भाजपा के ख़िलाफ़ ‘एकजुट’ हो रहा है, तो ऐसे में भाजपा को भी संघ की सलाह को ‘नज़रअंदाज’ नहीं करना चाहिए और टिकट वितरण के समय संघ के सर्वे पर पूरा गौर करना चाहिए।