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आरएसएस ने की मध्य प्रदेश के 16 भाजपा सांसदों के टिकट काटने की ‘सफारिश’!

11 Feb 2019
संघ के सर्वे में ‘फेल’ हुए भाजपा के 16 सांसद; कट सकता है टिकट
 

FEB 11 (WTN) – मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत के लिए भाजपा ने पूरी ताकत लगाई थी, लेकिन वो जीतते-जीतते रह गई और कांग्रेस के 114 विधायकों के मुकाबले भाजपा के 109 विधायक ही जीत हासिल कर सके। तमाम नाराज़गियों के बाद भी विधानसभा चुनाव में आरएसएस ने भाजपा के लिए काफ़ी प्रचार किया था लेकिन संघ भाजपा को जीत नहीं दिला सका। कहा जाता है कि संघ इन दिनों भाजपा से नाराज़ है क्योंकि विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण के समय संघ की नसीहतों को भाजपा ने नजरअंदाज़ कर दिया था और जिसका नतीजा यह रहा है कि भाजपा को हार का सामना करना पड़ा।
 
लेकिन संघ अब अतीत को भूलकर भविष्य की ओर देख रहा है और लोकसभा चुनाव के लिए मिशन मोड में आ गया है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद सतर्क हुए संघ ने भाजपा को लोकसभा चुनाव में टिकट वितरण के लिए अभी से सतर्क कर दिया है। कहा जाता है कि इस लोकसभा चुनाव में भाजपा ने राज्य की 29 में से 27 सीटों पर जीत का लक्ष्य तय किया है और इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए भाजपा रणनीति बनाने में लगी हुई है।
 
भाजपा इस लक्ष्य को पाने के लिए पूरा जोर लगाने की तैयारी में है, लेकिन संघ की मानें तो प्रदेश में भाजपा के 26 में से 16 सासंदों के प्रति लोगों में काफ़ी गुस्सा है। जानकारी के मुताबिक़ आरएसएस ने एक सर्वे रिपोर्ट कुछ दिनों पहले भाजपा को सौंपी है, जिसमें 26 में से 16 सासंदों के टिकट काटने की इसमें सिफारिश की गई है। संघ का तर्क है कि काफ़ी सांसदों की सक्रियता अपने लोकसभा क्षेत्र में बहुत कम रही है जिसके कारण वहां के लोगों में उनके प्रति भारी नाराज़गी है।
 
संघ के अनुसार विदिशा सांसद सुषमा स्वराज, खरगोन सांसद सुभाष पटेल, खजुराहो सांसद नागेंद्र सिंह और मुरैना सांसद अनूप मिश्रा समेत 16 सांसदों के प्रति जनता में काफ़ी नाराज़गी है। संघ की नसीहत है कि इन 16 सीटों पर नये चेहरों को टिकट मिलना चाहिए जिससे मिशन-27 में कोई परेशानी ना आए। यह पहली बार नहीं है जब संघ ने भाजपा को वर्तमान प्रतिनिधियों के टिकट काटने के सलाह दी हो। 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को संघ ने सलाह दी थी कि आधे से ज्यादा विधायकों के टिकट यदि नहीं काटे गये तो भाजपा को हार का सामना करना पड़ सकता है, और हुआ भी वही।
 
अब देखना होगा कि संघ की सलाह पर भाजपा कितना गौर करती है। वैसे यदि हाल ही में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव के आंकड़ों पर नजर डाली जाए, तो राज्य की 29 लोकसभा सीटों में से 17 सीटों पर भाजपा और 12 सीटों पर कांग्रेस आगे रही। यदि यही आंकड़े लोकसभा चुनाव में सीटों में बदलते हैं तो भाजपा के मिशन-27 को बड़ा झटका लगना तय है। साल 2014 के लोकसभा चुनाव के समय कांग्रेस विरोधी लहर के कारण भाजपा को राज्य की 29 में से 27 सीटों पर जोरदार जीत मिली थी, लेकिन 2019 के चुनाव में अब जबकि भाजपा खुद सत्ता में है तो सत्ता विरोधी लहर का उसे खुद सामना करना होगा।
 
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा संघ की सलाह पर कितना गौर करती है? जैसा कि आप जानते हैं कि विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने संघ की सलाह को दरकिनार किया था और उसने काफ़ी वर्तमान विधायकों के टिकट नहीं काटे थे जिसके कारण उसे हार का सामना करना पड़ा, यदि यही ग़लती भाजपा ने लोकसभा चुनाव में दोहराई, तो मोदी अगेन का सपना मध्य प्रदेश से टूट सकता है।
 
वैसे कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के लिए रणनीति बनाने में लगे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह संघ की सलाह पर जरूर गौर करेंगे, क्योंकि यदि दिल्ली की सत्ता पर काबिज होना है तो भाजपा को मध्य प्रदेश की ज्यादा से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल करना ही होगा, और मध्य प्रदेश में जीत हासिल करना है तो भाजपा को संघ की सलाह पर गौर करना होगा।