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ऑटोमैटिक टेक्नालॉजी के कारण वैश्विक स्तर पर 18 करोड़ महिलाओं की नौकरी जाने का ख़तरा

10 Oct 2018
ऑटोमैटिक टेक्नालॉजी के कारण बड़े पैमाने पर जा सकती हैं नौकरियां

OCT 10 (WTN) – यूं तो महिलाओं का नौकरी करना कोई आजकल के समय में कोई नई बात नहीं है, लेकिन यदि हम कहें कि आने वाले सालों में पूरी दुनिया में महिलाओं से जुड़ी लगभग 18 करोड़ नौकरियां खतरे में हैं तो आप चौक जाएंगे। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं कि क्योंकि अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने एक चेतावनी जारी कर कहा है कि ऑटोमैटिक टेक्नालॉजी आ जाने के कारण वैश्विक स्तर पर महिलाओं से जुड़ी क़रीब 18 करोड़ नौकरियां पर जोखिम है।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्वबैंक की इण्डोनेशिया के बाली में सालाना बैठक के दौरान एक नोट जारी किया गया है जिसमें 30 देशों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया और उसके बाद यह अनुमान लगाया गया है कि ऑटोमैटिक टेक्नालॉजी आ जाने से पूरी दुनिया में क़रीब 18 करोड़ महिलाओं की नौकरियों पर गम्भीर ख़तरा है। जिन तीस देशों की स्थिति का विश्लेषण किया गया है इनमें आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन के 28 देश और साइप्रस एवं सिंगापुर जैसे देश शामिल हैं।
 
नोट में साफ़ कहा गया है कि नई प्रौद्योगिकी के कारण महिला श्रमिकों की मांग कम हो सकती है। इससे महिलाओं को रोज़मर्रा के कामों के लिए कम मेहनताना मिल सकता है, इससे श्रम बाजार में महिलाओं की भागीदारी धीरे-धीरे कम होने लगेगी। इसी के कारण आईएमएफ ने दुनियाभर के नेताओं से गुज़ारिश की है कि वे महिलाओं को जरूरी कौशल प्रदान करें, ऊंचे पदों पर लैंगिक अंतर को कम करें, और साथ ही कामगारों के लिए डिजिटल अंतर को कम करने के लिए काम करें।
 
जानकारी के मुताबिक़, आने वाले बीस सालों में नई तकनीक के कारण इन 30 देशों के कुल 5.4 करोड़ श्रमिकों में 10% महिलाओं और पुरुष श्रमिकों की नौकरी पर सबसे ज़्यादा ख़तरा बना रहेगा। इसमें भी ऑटोमेशन के कारण 11 प्रतिशत महिला कामगारों की नौकरियों पर ख़तरा है। जबकि पुरुषों में यह स्तर 9% है। इससे इन देशों में 2.6 करोड़ महिलाओं की नौकरी जाने का डर है। इतना ही नहीं, कम पढ़ी-लिखी या 40 की उम्र पार कर चुकीं ऐसी उम्रदराज महिलाएं जो लिपिकीय कार्य, सेवा क्षेत्र या बिक्री के काम में लगी हैं, ऑटोमेशन से उनकी नौकरी भी जा सकती है।