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कर्मचारियों की मांग, संसद में पास हो 'दी राइट टू डिस्कनेक्ट बिल 2018'

10 Jan 2019
कर्मचारियों को तनाव से राहत दिला सकता है 'दी राइट टू डिस्कनेक्ट बिल 2018'
 
JAN 10 (WTN) – सुकून की हर किसी को तलाश रहती है खासतौर से उन्हें जो कि नौकरी करते हैं। नौकरी चाहे सरकारी हो या फ़िर प्रायवेट, ऑफिस के काम के चलते तनाव होना स्वाभाविक बात है। लेकिन इतने तनाव के बाद कर्मचारी सोचना है कि घर जाकर सुकून मिलेगा, पर घर जाकर भी यदि ऑफिस से बॉस का या फ़िर किसी वरिष्ठ अधिकारी का फ़ोन या ईमेल आ जाए तो फ़िर से तनाव बढ़ जाता है। यदि आप सोचें कि बॉस या वरिष्ठ अधिकारी के फ़ोन को रिसीव नहीं किया जाए या फ़िर मेल को चेक नहीं किया जाए तो आपको अनुशासनात्मक कार्रवाई का डर रहता है।
 
सोचिये कि यदि कोई ऐसा कानून बन जाए जिससे आप ऑफिस से आए फ़ोन को उठाने के लिए बाध्य ना हों। जी हां कुछ ऐसा ही प्रयास हुआ है भारत में भी। संसद के शीतकालीन सत्र में इस बार एक ऐसा भी बिल पेश किया गया, जो अगर पास हो जाता तो सरकारी या प्राइवेट कोई भी नौकरी करने वाले कर्मचारियों को बहुत राहत मिलेगी।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस बिल में प्रावधान था कि सरकारी या प्रायवेट नौकरी करने वाले कर्मचारी ऑफ़िस टाइम के बाद या छुट्टी पर रहने की स्थिति में अपने सीनियर अधिकारी का फ़ोन आने पर उसे डिस्कनेक्ट कर सकेंगे और यदि वे ऐसा करते हैं तो उन पर किसी भी तरह की कोई भी अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं होगी।
 
महाराष्ट्र से एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले द्वारा पेश इस बिल का नाम है 'दी राइट टू डिस्कनेक्ट बिल 2018'। सांसद सुले ने इस बिल के जरिये एक एम्पलाई वेलफेयर ऑथोरिटी बनाने की भी मांग की है जो कर्मचारियों के हक़ को सुरक्षित रख सके। वैसे यह बिल संसद में पारित नहीं हो सका है। सांसद सुप्रिया सुले के इस बिल में प्रावधान किया गया था कि अगर कोई कर्मचारी छुट्टी पर रहने या ड्यूटी ऑवर से बाहर रहने पर ऑफिस से आने वाले फ़ोन को रिसीव नहीं करता है या फ़िर ईमेल का जवाब नहीं देता है तो उस पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जाएगी।
 
इधर कर्मचारियों के लिए जिस ऑथोरिटी के गठन की बात की गई थी उसमें आईटी मंत्रालय के राज्यमंत्री बोर्ड के प्रमुख होंगे और श्रम मंत्रालय और कम्यूनिकेशन मंत्रालय के राज्यमंत्री को बोर्ड का वाइस चेयरमैन बनाया जाता। प्रावधान था कि इस ऑथोरिटी का काम होता कि वह रोज़गार देने वाले और कर्मचारियों के बीच इस बिल के अनुसार एक साल के अंदर एक चार्टर तैयार करती। बिल में इस कानून का पालन नहीं करने वाली कम्पनियों पर भारी जुर्माना का प्रावधान किया गया था।
 
बिल के मुताबिक़ कानून का उल्लंघन होने की स्थिति में कम्पनी पर सभी कर्मचारियों को दी जाने वाली तनख्वाह का एक प्रतिशत जुर्माना लगता। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस समय फ्रांस दुनिया का ऐसा पहला देश है जहां के कर्मचारियों को यह हक़ है कि वे ऑफिस ऑवर के बाद ऑफिस से आने वाले कॉल या ईमेल को यदि ना चाहें तो रिसीव ना करें। फ्रांस के अलावा न्यूयॉर्क में भी इसकी शुरुआत हो चुकी है और जर्मनी में भी इस पर कानून बनाने के लिए चर्चा चल रही है।
 
कहा जा रहा है कि इस बिल को एक बार फ़िर से नये तरीक़े से संसद में पेश किया जा सकता है। और यदि यह बिल पास होता है तो काम के कारण होने वाले मानसिक तनाव से कर्मचारियों को काफ़ी राहत मिलेगी। क्योंकि देखा गया है कि कई बार ऑफिस में ज़्यादा काम होने के कारण कर्मचारी तनाव में रहते हैं और घर आने पर भी उन्हें सुकून नहीं मिलता क्योंकि बॉस या वरिष्ठ अधिकारियों के फ़ोन आ जाते हैं। यदि यह बिल पारित हो जाता है तो काम के तनाव से कर्मचारियों को राहत मिल जाएगी।