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2019 लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ‘सतर्क’ और ‘चिन्तित’, कट सकते हैं कई मौजूदा सांसदों के टिकट!

09 Jul 2018
किसी की ‘उम्र’ तो किसी का ‘परफॉर्मेन्स’ हो सकता है टिकट कटने की वजह

JULY 09 (WTN) – 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रचण्ड जीत हासिल करने वाली भाजपा के लिए 2019 के लोकसभा चुनाव किसी ‘चुनौती’ से कम नहीं हैं। माना जा रहा है कि 2019 के चुनाव के लिए नरेन्द्र मोदी और अमित शाह कोई ‘गलती’ नहीं करना चाहते हैं, इसलिए माना जा रहा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा कई मौजूदा कद्दावर सांसदों के टिकट किसी ना किसी कारण से ‘काट’ सकती है।

मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ‘आशंकित’ तो है ही साथ ही काफी ‘सतर्क’ भी है। जानकारी के मुताबिक भाजपा, मंत्रियों सुषमा स्वराज, उमा भारती और राधा मोहन सिंह सहित अपने 150 मौजूदा सांसदों के टिकट काट सकती है। कहा जा रहा है कि इनके टिकट किसी ना किसी कारण से काटे जाएंगे।

जैसा कि आप जानते हैं कि विदिशा से सांसद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की किडनी ट्रांसप्लांट हुई है, ऐसे में उनका टिकट ‘बीमारी’ के नाम पर काटा जा सकता है। वहीं, केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती, कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह और लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने खुद पार्टी से कहा है कि वो अगला चुनाव लड़ना नहीं चाहते।

वहीं कहा जा रहा है कि कानपुर से सांसद मुरली मनोहर जोशी,  झारखण्ड की खूंटी सीट से सांसद करिया मुंडा,  कांगड़ा से सांसद शांता कुमार और गढ़वाल से सांसद बी.सी. खंडूरी के टिकट उम्र के आधार पर कट जाएंगे।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 2014 लोकसभा चुनाव के बाद से भाजपा की लोकसभा में सीटें कम हुई हैं। भाजपा को मध्य प्रदेश की रतलाम, राजस्थान की अजमेर और अलवर, पंजाब की गुरुदासपुर, यूपी की गोरखपुर, फूलपुर और कैराना और महाराष्ट्र के गोंदिया-भंडारा लोकसभा सीट पर हुए लोकसभा उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा था।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आरएसएस अपने स्तर पर पूरे देश में मौजूदा भाजपा सांसदों के कामों का ‘सर्वे’ करा रहा है। माना जा रहा है कि आरएसएस के रिपोर्ट जिन जिन सांसदों के लिए ‘नकारात्मक’ आएगी उस आधार पर भी कई सासंदों के टिकट कट सकते हैं। माना जा रहा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा को मात देने के लिए विपक्ष का ‘साझा उम्मीदवार’ खड़ा हो सकता है, जिसके चलते भाजपा 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए ऐसे प्रत्याशियों को टिकट देने की योजना में जिनका जनता में ‘विरोध ना हो’ और जिनमें विपक्ष के साझा उम्मीदवार से ‘टक्कर’ लेने की ‘क्षमता’ हो।