HOME WORLD INDIA BHOPAL BUSINESS ENTERTAINMENT SCIENCE & TECHNOLOGY SPORTS HEALTH
WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RECIPES DRINKS FUN FACTS WTN HINDI
EDUCATION LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE BIG MEMSAAB OPINION & INTERVIEW BrahMos
ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
BREAKING NEWS

6 सितम्बर के मध्य प्रदेश में ‘ऐतिहासिक बंद’ से सकते में भाजपा

07 Sep 2018
भाजपा को लगा ‘बड़ा झटका’, एससी-एसटी एक्ट में संशोधन से ‘नाराज़’ हुआ परम्परागत वोट बैंक

SEP 07 (WTN) – मध्य प्रदेश में लगातार 15 सालों से सत्ता का सुख भोग रही भाजपा के लिए इस बार के विधानसभा चुनाव अब किसी ‘अग्निपरीक्षा’ के कम नहीं हैं। कारण है एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के ‘ख़िलाफ’ पूरे प्रदेश में बन रहा माहौल। यदि सामान्य-पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों का ‘गुस्सा’ इसी तरह से एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के ख़िलाफ रहा, तो लगातार चौथी बार विधानसभा चुनाव जीतना भाजपा के लिए ‘सपना’ ही ना रह जाए।
 
एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के ख़िलाफ जिस तरह से 6 सितम्बर को पूरे मध्य प्रदेश में बंद सफल रहा है, उससे भाजपा नेताओं में ‘चिंता’ का माहौल है, और इसने पार्टी को सोचने के लिए विवश कर दिया है। यदि समय रहते भाजपा ने सामान्य और पिछड़ा वर्ग की ‘नाराज़गी’ दूर नहीं की, तो पार्टी का यह परम्परागत वोट बैंक बहुत ‘बड़ा झटका’ दे सकता है।
 
2018 के विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने ‘200 पार’ का नारा दिया है। लेकिन जिस तरह से भाजपा का परम्परागत वोट बैंक उससे ‘नाराज़’ हो गया है, उससे 200 सीटें तो छोड़िए भाजपा को 100 सीटें भी मिल जाएं तो काफ़ी है। क्योंकि एससी और एसटी मतदाता परम्परागत रूप से या तो बसपा का वोट बैंक रहा है या फिर कांग्रेस का। मुस्लिम मतदाता वैसे भी भाजपा को वोट करने से ‘परहेज़’ करता है। ऐसे में एससी-एसटी एक्ट में संशोधन करके भाजपा ने अपने परम्परागत वोट बैंक सवर्ण और पिछड़ों की ‘नाराज़गी’ बैठे बिठाए मोल ले ली है।
 
इधर, एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद जिस तरह से लोगों का गुस्सा सामने आ रहा है, उससे भाजपा के मातृ संगठन संघ की चिंता भी बढ़ गई है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, संघ के अंदरूनी सर्वे के अनुसार भाजपा के मौजूदा विधायकों में से 85 विधायक चुनाव जीतने के हालत में नहीं हैं।
 
मध्य प्रदेश में भाजपा पिछले 15 सालों से सत्ता में है। ऐसे में स्वाभाविक है कि पार्टी को ‘सत्ताविरोधी’ लहर का सामना तो करना ही पड़ेगा, लेकिन ऊपर से एससी-एसटी एक्ट में संशोधन कर भाजपा ने सामान्य वर्ग और पिछड़ा वर्ग को ‘नाराज़’ करके लगता है कि कुल्हाड़ी पर ही पैर मार लिया है।
 
6 सितम्बर के ऐतिहासिक बंद और सामान्य और पिछड़ा वर्ग की नाराज़गी के बाद भी भाजपा विधानसभा चुनाव में जीत के सपने देख रही है। भाजपा के शीर्ष नेताओं का मानना है कि पार्टी विकास और उपलब्धियों के दम पर चुनाव जीतेगी। लेकिन बड़ा सवाल तो यही है कि जो परम्परागत वोटर्स भाजपा के थे, वो तो नाराज़ चल रहे हैं, तो ऐसे में भाजपा को वोट देगा तो कौन। एससी-एसटी एक्ट में संशोधन से नाराज़ इस वर्ग ने तो NOTA में वोट देने का प्रचार भी शुरू कर दिया है। ऐसे में समझ नहीं आता कि आखिर किस आधार पर भाजपा जीत के सपने देख रही है।