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एक या दो नहीं बल्कि 8,000 से ज़्यादा हैं डोनाल्ड ट्रम्प के झूठे दावे!

23 Jul 2019
कश्मीर मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रम्प का दावा निकला झूठा; पूरी दुनिया में हुई ट्रम्प की जगहसाई
  
JULY 23 (WTN) – अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प हमेशा से ही विवादों में रहते हैं। ट्रम्प से उनके देश के आतंरिक और विदेशी मामले सुलझते नहीं हैं, और वे भारत जैसे विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के आतंरिक मसलों में हस्तक्षेप करने लगते हैं। ट्रम्प पर घमण्डी होने का आरोप तो लगता ही रहता है, लेकिन आरोप है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ग़लत बयान भी देते हैं और झूठे दावे भी करते हैं, जिसके कारण कई बार उनकी किरकिरी हो चुकी है। ख़ुद अमेरिका में उनके राजनीतिक विरोधी ट्रम्प पर ग़लत बयानबाज़ी का आरोप लगाते रहते हैं। इस सबके बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपने एक और झूठे दावे को लेकर सुर्खियों में हैं। ट्रम्प के इस दावे की पोल खुलने के बाद उनकी पूरी दुनिया में आलोचना हो रही है।

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने दावा किया है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कश्मीर मामले में मध्यस्थता करने के लिए अमेरिका से गुजारिश की थी। ट्रम्प का यह बयान उस समय आया है कि जबकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान अमेरिकी दौरे पर हैं। कश्मीर मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति के विवादित बयान के बाद भारत के कड़े विरोध और बढ़ते विवाद को देखते हुए व्हाइट हाउस को आगे आकर इस पर स्पष्टीकरण देना पड़ा है।
 
वैसे यह पहली बार नहीं है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ग़लत, झूठी या फिर गुमराह करने वाली कोई बात कही हो। डोनाल्ड ट्रम्प का इतिहास बताता है कि वे झूठे और गुमराह दावे करने में किसी से कम नहीं हैं, और वे ऐसा एक दो बार नहीं बल्कि अपने राष्ट्रपति कार्यकाल में अभी तक हज़ारों बार ऐसा कर चुके हैं।

मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद से लेकर इसी साल जनवरी तक डोनाल्ड ट्रम्प 8,158 बार झूठे या गुमराह करने वाले दावे कर चुके हैं। अमेरिकी अख़बार 'वॉशिंगटन पोस्ट' ने तो बाक़ायदा इसी साल जनवरी में ट्रम्प प्रशासन के दो साल पूरे होने पर ऐसी ही एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें कहा गया था कि डोनाल्ड ट्रम्प झूठे और गुमराह दावे करने में अव्वल हैं।

अमेरिकी अख़बार 'वॉशिंगटन पोस्ट' ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने कार्यकाल के पहले साल हर दिन औसतन करीब छह बार गुमराह करने वाले दावे किए, जबकि वहीं अपने कार्यकाल के दूसरे साल में ट्रम्प ने तीन गुना तेज़ी से हर दिन ऐसे क़रीब 17 दावे किए जो कि झूठे या फ़िर गुमराह करने वाले थे।

वॉशिंगटन पोस्ट अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में 'फैक्ट चेकर' के आंकड़ों का हवाला दिया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 'फैक्ट चेकर' राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा दिये गये हर संदिग्ध बयान का विश्लेषण, वर्गीकरण और पता लगाने का काम करता है। यदि 'फैक्ट चेकर' के आंकड़ों पर विश्वास किया जाए तो राष्ट्रपति बनने के बाद से लेकर इसी साल जनवरी के महीने तक डोनाल्ड ट्रम्प 8,158 बार झूठे और गुमराह करने वाले दावे कर चुके हैं।

अख़बार की रिपोर्ट में कहा गया है कि डोनाल्ड ट्रम्प ने सबसे ज़्यादा गुमराह करने वाले दावे इमिग्रेशन (आव्रजन) को लेकर किए हैं। इस बारे में वह अब तक 1,433 दावे कर चुके हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रम्प विदेश नीति को लेकर 900 दावे कर चुके है। वहीं व्यापार को लेकर 854 दावे, अर्थव्यवस्था को लेकर 790 दावे और नौकरियों को लेकर वे 755 दावे कर चुके हैं। डोनाल्ड ट्रम्प इसी तरह अन्य मामलों को लेकर अभी तक 899 बार दावे कर चुके हैं, और इन दावों के बारे में फैक्ट चेकर का कहना है कि यह सभी दावे झूठे और गुमराह करने वाले हैं।
 
यानी कि साफ़ है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर लगातार झूठे और गुमराह करने वाले दावे करने का आरोप लगा है। कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान को लेकर जो दावा ट्रम्प ने किया है वो भी गुमराह करने वाला ही साबित हुआ है। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस मुद्दे पर संसद में आधिकारिक बयान देते हुए स्पष्ट किया है कि कश्मीर, भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मुद्दा है, और इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरफ़ से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से किसी भी तरह की मध्यस्थता की कोई भी पेशकश नहीं की गई है।

कश्मीर मुद्दे पर किये गये दावे के बाद डोनाल्ड ट्रम्प अब अपने ही देश में घिर गये हैं। अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर बाक़ायदा ट्वीट करते हुए कहा है कि कश्मीर एक दि्वपक्षीय मुद्दा है और दोनों पक्षों को इस पर चर्चा करनी चाहिए। अपने ट्वीट में अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने लिखा है “कश्मीर एक दि्वपक्षीय मुद्दा है, जिस पर दोनों पक्षों को चर्चा करनी चाहिए। ट्रम्प प्रशासन भारत और पाकिस्ता की वार्ता का स्वागत करता है और अमेरिका हमेशा मदद करने के लिए तैयार है।”

इधर अमेरिकी सांसद ब्रैड शेरमैन ने ट्रम्प के बयान को शर्मिंदगी से भरा बयान बताया है। अमेरिकी सांसद शेरमैन ने ट्वीट करते हुआ लिखा, “जो भी कोई दक्षिण एशिया की विदेश नीति के बारे में जानता है, उसे पता है कि भारत लगातार कश्मीर मुद्दे पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता का विरोध करता रहा है। सभी जानते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी कभी भी ऐसा प्रस्ताव नहीं देंगे। ट्रम्प का बयान बचकाना, भ्रामक और शर्मनाक है।” सासंद ब्रैड शेरमैन ने ट्रम्प के कश्मीर मुद्दे पर दिये गये बयान के बाद अमेरिका में भारत के राजदूत से माफ़ी भी मांगी।

यह एक या दो बार नहीं है जब अमेरिकी राष्ट्पति डोनाल्ड ट्रम्प ने झूठा या फ़िर गुमराह करने वाला दावा किया हो। खुद अमेरिकी अख़बार अपनी रिपोर्ट में कह रहे हैं कि ट्रम्प 8 हज़ार से ज़्यादा बार झूठे और गुमराह करने वाले दावे कर चुके हैं, जिसके बाद उनकी विश्वसनीयता पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। कश्मीर मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका से मध्यस्थता की मांग का दावा भी ट्रम्प का एक झूठा और गुमराह करने वाला दावा है।

विश्व की एक बड़ी सैन्य और आर्थिक शक्ति भारत को कश्मीर मुद्दा सुलझाने के लिए किसी मध्यस्थ की ज़रूरत नहीं है। डोनाल्ड ट्रम्प को पहले चीन, ईरान और उत्तर कोरिया से अपने मसलों को सुलझाना चाहिए। वैसे ट्रम्प को हक़ और ज़रूरत नहीं है कि वे भारत के आंतरिक मसलों पर झूठे और गुमराह करने वाले दावे करें। भारत ख़ुद में इतना सक्षम है कि वो अपने दम पर कश्मीर मुद्दे को सुलझा सकता है।