शोध के मुताबिक़ BCG टीकाकरण वाले देशों में कोरोना वायरस संक्रमण का ख़तरा 10 गुना कम!
APRIL 01 (WTN) - आज मानव सभ्यता कोरोना वायरस संक्रमण के ख़िलाफ़ अपने आतित्व की लड़ाई लड़ रही है। 200 से ज़्यादा देश इस समय अपने नागरिकों को कोरोना वायरस संक्रमण से बचाने के काम में लगे हुए हैं। इस लेख को लिखे जाने तक पूरी दुनिया में कोरोना वायरस संक्रमण से मारे गए लोगों की संख्या 42,322 हो गई है। यूरोप के विकसित देश इटली में कोरोना वायरस के कारण सबसे ज़्यादा 12,428 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति अमेरिका में कोरोनो वायरस संकमण से संक्रमित मरीज़ों की तादात सबसे ज़्यादा 1,88,578 हो चुकी है।
जहां तक भारत की बात है, तो दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले देश भारत में कोरोना वायरस संक्रमण से अभी तक 35 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 1,397 लोग कोरोना वायरस संक्रमण से संक्रमित बताए जाते हैं। दुनिया के लिए सबसे बड़ा ख़तरा बन चुकी कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप को पहले ही जानते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूरे भारत में 21 दिन का लॉकडाउन घोषित किया हुआ है। वैसे देखा जाए तो भारत की आबादी के हिसाब से कोरोना वायरस संक्रमण से हुई मौतें अन्य देशों की तुलना में काफ़ी कम हैं। वहीं संक्रमित मरीज़ों की तादाद भी अन्य देशों से तुलनात्मक रूप से कम हैं।
दरअसल, भारत में अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण नियंत्रण में हैं, और इसके पीछे एक बहुत बड़ा कारण है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि न्यूयॉर्क इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) के डिपार्टमेंट ऑफ बायोमेडिकल साइंसेस के एक शोध में दावा किया गया है कि जिन देशों में टीबी (TB) की रोकथाम के लिए बच्चों को BCG (Bacille Calmette Guerin) का टीका लगाया जाता है, उन देशों में कोरोना वायरस संक्रमण और उससे मौत के मामले अन्य देशों की तुलना में कम हैं, और आगे भी कम ही रहेंगे।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 1962 में भारत में नेशनल टीबी प्रोग्राम शुरू हुआ था। साफ़ ज़ाहिर है भारत की बहुसंख्यक जनसंख्या को यह टीका लग चुका है। यह टीका बच्चे के जन्म से लेकर 6 महीने के भीतर लगाया जाता है। डॉक्टर्स के मुताबिक़, BCG का टीका सांस से जुड़ी बीमारियों की रोकथाम में कारगर साबित होता है। दरअसल, BCG के टीके में इंसानों में फेफड़ों की टीबी का कारण बनने वाले बैक्टीरिया की स्ट्रेन्स होती हैं। इस स्ट्रेन का नाम मायकोबैक्टिरियम बोविड है। टीका बनाने के दौरान एक्टिव बैक्टीरिया की ताकत को घटा दिया जाता है, जिससे यह स्वस्थ इंसान में बीमारी न फैला सके। एक रिपोर्ट के मुताबिक़, BCG का टीका वायरस से सीधा मुकाबला नहीं करता है। बल्कि BCG की वैक्सीन बैक्टीरिया से मुकाबले के लिए मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करती है। ऐसा होने से मनुष्य का शरीर बैक्टीरिया का हमला आसानी से सहन कर लेता है।
शोध के अनुसार, कोरोना वायरस संक्रमण और उससे हुई मौत के मामले उन देशों में ज़्यादा हैं, जहां BCG टीका की पॉलिसी या तो नहीं है या बंद कर दी गई है। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि अमेरिका, इटली और स्पेन जैसे देशों में
BCG टीकाकरण नहीं होता है। और यही कारण है कि इन देशों में कोरोना वायरस से संक्रमण और मौतों के मामले बहुत ज़्यादा हैं। इसी आधार पर अमेरिकी वैज्ञानिकों के अनुसार, जिन देशों में BCG टीकाकरण नहीं होता है, उन देशों में कोरोना वायरस संक्रमण से मरने वालों की संख्या ज़्यादा रहेगी।
वैज्ञानिकों ने अपने रिसर्च में बताया है कि BCG टीकाकरण से वायरल इन्फेक्शन और सेप्सिस जैसी बीमारियों से लड़ने में काफ़ी मदद मिलती है। और इसी कारण से वैज्ञानिक मान रहे हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण से जुड़े मामलों में BCG टीकाकरण एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। अलग-अलग देशों से मिले आंकड़ों और उन देशों की स्वास्थ्य सुविधा का अध्ययन करने के बाद वैज्ञानिक का मानना है कि BCG टीकाकरण वाले देशों में कोरोना वायरस संक्रमण फैलने का ख़तरा 10 गुना कम है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत समेत जापान और ब्राज़ील में अभी भी BCG टीकाकरण होता है। और यही कारण है कि इन देशों में अभी तक कोरोना वायरस से संक्रमण और मौतों के मामले अन्य देशों की तुलना में कम हैं। हालांकि, चीन में भी BCG टीकाकरण होता है, लेकिन कोरोना की शुरुआत यहींं से होने के कारण शोध में इसे अपवाद माना गया है। लेकिन ऐसा नहीं है कि BCG टीकाकरण से आप सुरक्षित हैं और घर से बाहर निकल सकते हैं। हमारा आपसे अनुरोध है कि 21 दिन पूरी तरह से लॉकडाउन का पालन करें और लोगों से दूरी बनाए रखें।