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तो क्या 'इस तकनीक' से मिल पाएगी COVID-19 की वैक्सीन?

08 Apr 2020

COVID-19 की वैक्सीन खोजने में लगे दुनियाभर के शोधकर्ता 

APRIL 08 (WTN) - दुनियाभर के डॉक्टर्स, वैज्ञानिकों और चिकित्सकीय शोधकर्ताओं के लिए COVID-19 यानी कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी इस समय की सबसे बड़ी चुनौती है। जैसा कि आप जानते ही हैं कि चीन के वुहान शहर से उपजा और फैला कोरोना वायरस संक्रमण 200 से ज़्यादा देशों में फैल चुका है। इस लेख को लिखे जाने तक कोरोना वायरस संक्रमण के कारण पूरी दुनिया में अभी तक 82,143 लोगों की मौत हो चुकी है, और 14,34,000 से ज़्यादा लोग कोरोना वायरस संक्रमण से संक्रमित हो चुके हैं।

कोरोना वायरस संक्रमण यानी COVID-19 का अभी तक कोई प्रामाणिक और ठोस इलाज नहीं ढूंढा जा सका है। ऐसे में कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए दुनिया के कई देशों में लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग को आज़माया जा रहा है। वहीं लोग रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर भी ज़ोर दे रहे है। वहीं कोरोना वायरस संक्रमण का इलाज ढूंढने के लिए दुनिया भर में शोध जारी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोरोना वायरस से संबंधित किसी भी बीमारी का इलाज अभी तक नहीं ढूंढा जा सका है। यानी कि कोरोना वायरस से संबंधित SARS (Severe Acute Respiratory Syndrome), MERS (Middle East Respiratory Syndrome ) और SARS CoV-2 जनित COVID-19 का इलाज अभी तक नहीं ढूंढा जा सका है।

कोरोना वायरस संक्रमण की वैक्सीन और दवा पर दुनिया के कई देशों में शोध जारी है। इसी के बीच, अब शोधकर्ताओं को लगता है कि MERS के ख़िलाफ़ वैक्सीन बनाने में उनकी एक तकनीक COVID-19 की वैक्सीन बनाने के काम आ सकती है। दरअसल, दुनिया की बहुत सी लैब इस वायरस की कमजोरी को समझने में अपना ध्यान लगा रही हैं। अमेरिकन सोसाइटी ऑफ माइक्रोबायोलॉजी के जर्नल के एक शोध के मुताबिक़, शोधकर्ताओं की एक टीम ने MERS वायरस के लिए एक वैक्सीन के बारे में चर्चा की है।

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि MERS साल 2012 में फैला था। MERS के कारण पूरी दुनिया में क़रीब 850 से ज़्यादा लोग मारे गए थे। अब शोधकर्ताओं का कहना है कि जो पद्धति जो SERS वायरस वैक्सीन के लिए अपनाई गई थी, SARS Cov-19 यानी COVID-19 के ख़िलाफ़ भी काम आ सकती है। शोधकर्ताओं के अनुसार, इस वैक्सीन में एक RNA वायरस पाया जाता है जिसे पैराइंफ्लूएंजा वायरस 5 (Parainfluenza Virus 5) कहा जाता है। शोधकर्ताओं का दावा है कि इसी वायरस का इस्तेमाल वैक्सीन के रूप में हो सकता है।

जानकारों के अनुसार, यह RNA वायरस कुत्तों में केनल (kennel) खांसी के हालात पैदा करने के लिए ज़िम्मेदार होता है, लेकिन यह वायरस मनुष्यों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है। शोध के दौरान शोधकर्ताओं ने इस वायरस में एक अतिरिक्त जीन (Gene) को जोड़ा, जिससे MERS संक्रमण संबंधी ‘S’ प्रोटीन पैदा होने लगा।

शोधकर्ताओं के मुताबिक़, पैराइंफ्लूएंजा वायरस 5मनुष्यों में नहीं फैलता है और यह मनुष्यों में कोई खराब प्रभाव भी नहीं डालता है। इस वैक्सीन का जब चूहों पर प्रयोग किया गया तो चूहों में MERS बनना बंद हो गया। शोध में पाया गया कि जिन चूहों को 'S' प्रोटीन वाली वैक्सीन दी गई थी वे MERS संक्रमण से नहीं मरे। इसी अध्ययन को शोधकर्ता अब आगे बढ़ा कर COVID-19 पर भी करके देखना चाहते हैं। आशा की जानी चाहिए कि जल्द से जल्द COVID-19 की वैक्सीन बनाने में सफलता हासिल हो जाए जिससे लाखों लोगों की जान बच सके।