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...तो 'इस कारण' से बंद हो जाएंगे कई सारे TV चैनल्स!

27 Jul 2020

TRAI ने तय की हर चैनल की MRP, TV चैनल्स के रेवेन्यू पर असर पड़ना तय

JULY 27 (WTN) - एक समय था जब देश में दूरदर्शन ही एकमात्र TV चैनल हुआ करता था। लेकिन, समय के साथ बदलाव आया और आज के समय देश में सैकड़ों की संख्या में TV चैनल्स हैं। हालांकि, यह सही है कि भारत में काफ़ी ज़्यादा तादात में TV चैनल्स हैं। लेकिन, ज़रुरी नहीं है कि सभी TV चैनल्स को लाभ ही हो रहा है। वहीं, अब TRAI (Telecom Regulatory Authority of India) के एक आदेश के बाद से देश में बड़ी तादात में TV चैनल्स बंद होने की कगार पर आ गए हैं।

दरअसल, TRAI ने TV ब्रॉडकास्‍टर्स को New Terrif Order (NTO 2.0) का तुरंत पालन करने के निर्देश दिए हैं। अब यदि इस आदेश पर अमल किया जाता है, तो इससे बड़ी संख्‍या में आर्थिक रूप से संकटग्रस्‍त TV चैनल्स बंद हो सकते हैं। हालांकि, सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने मई के महीने में आईबीएफ (IBF) के सदस्‍यों के साथ बैठक में भरोसा दिया था कि NTO 2.0 को फिलहाल अभी जारी नहीं किया जाएगा। लेकिन, इसके बाद भी इस तरह के निर्देश जारी किए गए हैं।

दरअसल, TRAI ने हर एक चैनल की MRP को अधिकतम 12 रुपये तय कर दिया है। वहीं, TRAI ने चैनल बकेट पर डिस्‍काउंट की सीमा भी 33 प्रतिशत निर्धारित कर दी है। TRAI के इस आदेश के बाद प्रसारणकर्ताओं का कहना है कि NTO 2.0 से उनके चैनल के दाम तय करने की क्षमता पर असर पड़ेगा और उन्हें भारी नुकसान होगा।

जानकारी के अनुसार, यदि NTO 2.0 अमल में लाया जाता है, तो ऐसा करने से अगले कुछ सालों में क़रीब 100-150 चैनल्स बंद हो सकते हैं। दरअसल, नए टैरिफ ऑर्डर के तहत जिस चैनल की पहुंच बहुत ज़्यादा नहीं है, उसे मोनेटाइज नहीं किया जा सकता है और उसे पोर्टफोलियो बेनिफिट या बकेट एडवांटेज मिल सकता है। ऐसे में TRAI के नए आदेश से 100 से ज़्यादा चैनल्स बंद हो सकते हैं क्योंकि नए नियमों के बाद उन्‍हें चलाना आर्थिक रूप से फायदे का सौदा नहीं रह जाएगा।

दरअसल, बिना पहुंच के चैनल्स को ज़्यादा विज्ञापन नहीं मिल पाते हैं। ऐसे में चैनल्स को ख़ुद को अस्तित्व में रखने के लिए सब्‍सक्रिप्‍शन रेवेन्‍यू ही एकमात्र सहारा बचता है। अब जबकि NTO 2.0 के नियम लागू हो रहे हैं, और चैनल्स की क़ीमत MRP से ज़्यादा नहीं हो सकती है, तो ऐसे में बहुत से चैनल्स का अस्तित्व में बने रहना काफ़ी मुश्किल होगा।

साफ़ है कि यदि TRAI ने NTO 2.0 के नियमों में बदलाव नहीं किया, तो इसका असर अंग्रेजी चैनल्स पर ही नहीं बल्कि कई क्षेत्रीय चैनल्स पर भी पड़ेगा। हालांकि, TRAI के NTO 2.0 के नियम को इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन (आईबीएफ) और फिल्‍म एंड टीवी प्रोड्यूसर्स गिल्‍ड ऑफ़ इंडिया ने बॉम्‍बे हाई कोर्ट में चुनौती दी है। पर कोर्ट ने मामले में सुनवाई पूरी कर निर्णय को सुनिक्षित कर लिया था और ब्रॉडकास्‍टर्स को कोई अंतरिम राहत नहीं दी है। ख़ैर, अब देखना होगा कि NTO 2.0 के मामले में अदालत का क्या कुछ निर्णय आता है? और, क्या अदालत के निर्णय से चैनल्स को राहत मिलती है कि नहीं?